संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में शिकोहाबाद के राहुल यादव ने भी सफलता पाकर नाम रोशन किया है। गांव की माटी में पल-बढ़कर राहुल यादव ने बचपन में ही आईएएस बनने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से राहुल ने आईएएस परीक्षा में 1043 रैंक हासिल की।
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शिकोहाबाद के नगला गुलाल निवासी राहुल का बचपन से ही राष्ट्र सेवा करने का लक्ष्य था। पिता रामपाल सिंह यादव सेना में नायाब सूबेदार रहे। पिता के अनुशासन ने राहुल को पढ़ाई के साथ हर काम में अव्वल रखा। राहुल यादव का चयन सेना स्कूल, धौलपुर में हुआ। यहां से राहुल ने 82 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की।
इंटरमीडिएट परीक्षा में करीब 66 अंक प्राप्त किए। इसके बाद कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक के साथ आईएएस बनने की तैयारी की। कड़ी मेहनत से राहुल का चयन असिस्टेंट कमांडेंट आरपीएफ पर हो गया। हालांकि आरपीएफ में ज्वाइनिंग से पहले ही राहुल का चयन आईएएस में हो गया।
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उनके चयन के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है। अपनी सफलता का श्रेय राहुल ने मां कुसुम यादव के साथ पिता रामपाल सिंह को भी दिया है। वहीं, राहुल अपना आदर्श दादा स्वतंत्रता सेनानी स्व. सालिगराम को मानते हैं। राहुल ने बताया कि उन्हें स्वामी विवेकानंद के विचार बहुत पसंद हैं। उन्हीं पर अमल करते हुए वह यहां तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि देश सेवा करने के लिए आईएएस बनने का लक्ष्य था।
नूरुल का सिविल सेवा में चयन
खुदी न बेच, गरीबी में भी नाम पैदा कर... अल्लामा इकबाल के शेर की इस लाइन के मुताबिक ही अर्दली शमसुल हसन के बेटे नूरुल हसन ने गरीबी में संघर्ष करते हुए नाम पैदा किया है। सिविल सेवा की परीक्षा में नूरुल को दूसरे ही प्रयास में 625 वीं रैंक मिली है। पहले प्रयास में वह इंटरव्यू क्वालीफाई नहीं कर पाए थे। लेकिन, इस बार उन्हें इतनी अच्छी रैंक मिल गई। इस समय वह भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन में वैज्ञानिक हैं।
पीलीभीत के अमरिया ब्लॉक के हर्रायपुर गांव के रहने वाले नूरुल हसन का कहना है कि गरीब होने पर कामयाब होने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है। मैंने भी काफी संघर्ष किया। ज्ञान बढ़ाने के लिए अखबार की जरूरत होती थी, मगर अखबार खरीदने के लिए भी मेरे पास रुपये नहीं होते थे। इसलिए, मैं चाय की दुकानों में जाकर अखबार पढ़ता था।
गरीबी की वजह से ही मुझे पढ़ाई पूरी करते ही तुरंत नौकरी ज्वॉइन करनी पड़ी, क्योंकि मुझे अपना घर चलाना था। मेरे घर में दो भाई और हैं, उन्हें भी मुझे पढ़ाना था। इसलिए, मैंने पढ़ाई करने के बाद पहले जर्मन मल्टीनेशनल कंपनी सीमेन्स में बतौर इंजीनियर काम किया। इसके बाद 2010 में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में मेरा चयन हो गया। तब से मैं वहां पर न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन में बतौर वैज्ञानिक जॉब कर रहा हूं।
नूरुल की मां तहसीन जहां सिर्फ आठवीं तक पढ़ी हैं, हालांकि उनके पिता शमसुल हसन ग्रेजुएट हैं। पिता आंवला (बरेली) के मुंसिफ कोर्ट में अर्दली हैं। नूरुल के दो भाइयों में एक सैफई मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चुका है और दूसरा एक अच्छी कंपनी में बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जॉब कर रहा है। दोनों को नूरुल ने ही पढ़ाया है
नूरुल ने खुद 2001 में गुरुनानक हायर सेकेंड्री स्कूल, अमरिया, पीलीभीत से हाईस्कूल पास किया। 2003 में मनोहर भूषण इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट। इसके बाद 2009 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बीटेक किया। बतौर वैज्ञानिक काम करते हुए नूरुल ने हमदर्द स्टडी सर्किल से सिविल परीक्षा की पढ़ाई के लिए मदद लेकर सेल्फ स्टडी की और 625वीं रैंक लेकर अपने परिवार का नाम रोशन किया।
नूरुल का कहना है कि उनके नाना रमन शाह शुरू से ही कहते थे कि वह एक दिन सिविल ऑफिसर बनेगा। उनके शब्दों को नूरुल ने साकार कर दिखाया है। नूरुल की इस कामयाबी से पूरा परिवार बहुत खुश है। हर तरफ से बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
अंशिका ने किया नाम रोशन
अंशिका अग्रवाल ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण कर शानदार उपलब्धि हासिल की है। शनिवार को यूपीएससी के घोषित हुए परिणाम में अंशिका को 361वीं रैंक मिली है। इससे पहले से फरवरी में वह इंडियन फारेस्ट सर्विस के लिए चुनी गई थीं।
गुजराती मोहल्ला में रहने वाली अंशिका अग्रवाल के लिए साल 2015 उपलब्धियों से भरा रहा। फरवरी में यूपीएससी की ओर से कराई गई परीक्षा में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ था।
चयन के बावजूद वे सिविल सर्विसेज की तैयारी में लगी रहीं। शनिवार को सिविल सर्विसेज का परिणाम घोषित हुआ। अंशिका ने सामान्य वर्ग में 361वीं रैंक हासिल की। 12वीं तक की पढ़ाई सेंट मैरी से करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया।
डीयू से जूलॉजी में एमएससी की। इसी दौरान सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू करते हुए कोचिंग भी की। अंशिका के पिता ओमप्रकाश अग्रवाल एक्सपोर्ट का काम करते हैं, जबकि उनकी मां बीना अग्रवाल हाउस वाइफ हैं।
बैंक प्रबंधक ने होनहार बेटी अंकिता सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा में 664वीं रैंक हासिल कर कुंदरकी क्षेत्र का नाम रोशन किया है। बेटी की कामयाबी पर पूरे इलाके में जश्न का माहौल है। रविवार को अंकिता के माता-पिता को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
कुंदरकी क्षेत्र के ग्राम रामपुर मेंगन वाली निवासी राजवीर सिंह पुत्र रामगोपाल सिंह प्रथमा बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर खुशहालपुर में तैनात हैं। राजवीर सिंह का परिवार मौजूदा समय में मुरादाबाद की मानसरोवर कालोनी में रह रहा है जबकि गांव में अन्य परिजन रहते हैं।
अंकिता इस समय दिल्ली में है। रविवार की शाम में गांव रामपुर मेंगन पहुंचे अंकिता के पिता राजवीर सिंह, मां गीता सिंह और भाई आकर्ष सिंह को परिजनों ने मिठाई खिलाकर बधाई दी। अमर उजाला से बातचीत में अंकिता ने कहा कि सिविल सर्विसेज के माध्यम से वह समाज सेवा करना चाहती है।