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UPSC: यूपीएससी में वैकल्पिक विषय की भूमिका कितनी अहम? चुनने से पहले जानें ये जरूरी बातें

Tue, 15 Apr 2025 10:39 AM IST
शाहीन परवीन जॉब्स डेस्क, अमर उजाला

सार

UPSC Optional Subjects: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में वैकल्पिक विषय की भूमिका बहुत अहम है, क्योंकि यह आपके कुल अंक में महत्वपूर्ण योगदान देता है। आइए जानें कि इस चयन में किन पहलुओं पर गौर करना चाहिए।
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UPSC - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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UPSC: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए रणनीतिक सोच, सटीक योजना और सही विषय चयन बेहद आवश्यक होता है। खासकर "वैकल्पिक विषय" की भूमिका इस यात्रा में निर्णायक हो सकती है, क्योंकि मुख्य परीक्षा में इसके कुल 500 अंक होते हैं।

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यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां उम्मीदवार अपनी ताकत के अनुसार स्कोर कर सकते हैं। लेकिन वैकल्पिक विषय चुनते समय कुछ अहम बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, जिससे यह निर्णय आपकी सफलता की नींव बन सके न कि बोझ। आइए जानें कि इस चयन में किन पहलुओं पर गौर करना चाहिए।

वैकल्पिक विषय क्यों है इतना जरूरी?

यूपीएससी मेन्स परीक्षा में कुल 1750 अंक होते हैं, जिनमें से 500 अंक सिर्फ वैकल्पिक विषय के लिए तय होते हैं। यानी यह अकेला विषय आपकी रैंक को बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है। सामान्य अध्ययन (GS) के पेपर में अंक थोड़े अनिश्चित होते हैं। आप मेहनत करें फिर भी नंबर कम आ सकते हैं। लेकिन वैकल्पिक विषय में अगर आपने अच्छी तैयारी की है, तो इसमें अच्छे अंक लाना ज्यादा आसान होता है।

कैसे बनता है यह निर्णायक कारक?

अक्सर देखा गया है कि जीएस पेपर में उम्मीदवारों को औसतन 45-50% के आसपास ही अंक मिलते हैं। वहीं टॉपर्स अपने वैकल्पिक विषय में 60-70% तक स्कोर कर लेते हैं, यानी लगभग 300-320 अंक। यही अतिरिक्त अंक उन्हें बाकी उम्मीदवारों से 40-60 अंकों की बढ़त दे देते हैं, जो फाइनल रैंक में बड़ा फर्क ला सकते हैं।

वैकल्पिक विषय चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

रुचि और समझ: सबसे पहले यह देखें कि किस विषय में आपकी रुचि है। जिस विषय को पढ़ने में मजा आता हो, वही ज्यादा समय तक पढ़ा जा सकता है। अगर किसी विषय को समझने में आसानी होती है, तो उसे याद रखना और लिखना भी आसान होता है।

सिलेबस छोटा और आसान: कुछ विषयों का सिलेबस छोटा होता है, जैसे - दर्शनशास्त्र (Philosophy), मानवशास्त्र (Anthropology) या समाजशास्त्र (Sociology)। ऐसे विषयों को कम समय में अच्छे से तैयार किया जा सकता है।

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पिछले वर्षों का प्रदर्शन (ट्रेंड्स): कुछ विषय हर साल अच्छे नंबर दिलाते हैं। हालांकि सिर्फ दूसरों को देखकर विषय न चुनें, लेकिन यह देखना फायदेमंद हो सकता है कि कौन से विषयों में अच्छे मार्क्स आ रहे हैं।

गाइड और सामग्री की उपलब्धता: यह भी देखें कि जिस विषय को आप चुनना चाहते हैं, उसकी किताबें, नोट्स और कोचिंग आसानी से उपलब्ध हैं या नहीं। अगर किसी विषय की तैयारी में ज्यादा परेशानी होती है, तो ऐसा विषय न लें।

विषय का चयन: अगर आपने ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन में कोई विषय पढ़ा है और वह वैकल्पिक विषयों में उपलब्ध है, तो वही चुनना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी तैयारी में समय और मेहनत दोनों बचेंगे।

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कौन-कौन से वैकल्पिक विषय ज्यादा पसंद किए जाते हैं?

हर साल लाखों उम्मीदवारों के बीच कुछ वैकल्पिक विषय खास तौर पर ज़्यादा चुने जाते हैं, जैसे- दर्शनशास्त्र (Philosophy), समाजशास्त्र (Sociology), भूगोल (Geography), मानवशास्त्र (Anthropology), इतिहास (History) और राजनीति शास्त्र (Political Science)। इन विषयों को इसलिए पसंद किया जाता है क्योंकि इनका सिलेबस सीमित होता है साथ तैयारी में ज्यादा कठिनाई नहीं होती और सही रणनीति के साथ अच्छे अंक लाए जा सकते हैं।
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