: रेलवे विभाग द्वारा आयोजित नर्सिंग अधीक्षक प्रवेश परीक्षा, जो 28 से 30 अप्रैल तक आयोजित की गई थी। जिसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अभ्यर्थियों को जारी किए गए प्रवेश पत्रों में परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले मंगलसूत्र, जनेऊ और अन्य धार्मिक प्रतीकों को हटाने के निर्देश दिए गए थे।
प्रवेश पत्र में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि अभ्यर्थियों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा के दौरान कोई भी आभूषण, जैसे मंगलसूत्र, झुमके, नाक की पिन, अंगूठी, कंगन और जनेऊ पहनने पर प्रतिबंध है।
यह विवाद हाल ही में कर्नाटक में आयोजित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान एक और विवाद के बाद उभरा। इस परीक्षा में हिंदू छात्रों से पवित्र धागे (जनेऊ) उतारने के लिए कहा गया था, जिससे धार्मिक प्रतीकों के बारे में चिंताएं पैदा हो गई थीं। अब रेलवे नर्सिंग अधीक्षक परीक्षा में इसी तरह के निर्देशों ने इस मुद्दे को और बढ़ा दिया है।
अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों का विरोध
कई अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नकारने की कोशिश है और महिलाओं के धार्मिक प्रतीकों को लेकर असंवेदनशीलता दिखाती है।
सोशल मीडिया यूजर शरण कुमार पंपवेल ने भी इस निर्णय पर अपना विरोध जताया। उन्होंने फेसबुक पर एडमिट कार्ड की तस्वीरें साझा करते हुए इस कदम की आलोचना की और इसे "धर्म विरोधी रुख" बताया। कुमार ने कहा कि यह आदेश हिंदू धर्म और उसकी सांस्कृतिक पहचान का अपमान है, और उन्होंने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
उन्होंने जिला कलेक्टर और क्षेत्रीय सांसदों सहित अन्य अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हिंदू उम्मीदवारों को अपनी धार्मिक प्रथाओं से समझौता किए बिना परीक्षा में बैठने की अनुमति मिले। इसके साथ ही, उन्होंने दक्षिण कन्नड़ के लोकसभा सांसद कैप्टन बृजेश चौटा को भी टैग किया।