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PMVY: पीएम विश्वकर्मा योजना से युवाओं को मिल रहे रोजगार के मौके, उद्योगों को मिलेगी मजबूती; जानें उद्देश्य

Thu, 13 Feb 2025 10:24 AM IST
शाहीन परवीन जॉब्स डेस्क, अमर उजाला

सार

PM Vishwakarma Yojana: पीएम विश्वकर्मा योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इस योजना का लक्ष्य भारत के कारीगरों और शिल्पकारों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जहां वे अपनी कला को निखार सकें और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें।
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PM vishwakarma yojana - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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PM Vishwakarma Yojana: देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का सिलाई मशीन उद्योग ने स्वागत किया है। इस योजना में कौशल विकास प्रशिक्षण के तहत महिलाओं और पुरुषों को दर्जी का काम सिखने-सिखाने का मौका मिल रहा है। उद्यमियों की माने तो इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साथ ही स्टार्ट अप को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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ओखला स्थित राष्ट्रीय लघु के उद्योग निगम (एनएसआईसी) के कार्यक्रम में सिलाई मशीन उद्योग विशेषज्ञ संदीप सिंह ने बताया कि देश के संपूर्ण सिलाई मशीन उद्योग में सबसे बड़ी हिस्सेदारी लुधियाना की है, जहां बहुत सारी छोटी-छोटी फैक्ट्रियां हर साल हजारों सिलाई मशीनों का निर्माण करती हैं

स्थानीय मशीनें विशेष रूप से भारतीय कारीगरों की जरूरतों को पूरा कर रहा है। इससे ना सिर्फ एमएसएमई उद्योग को बढ़ावा मिल रहा बल्कि बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार भी पैदा हो रहा है। स्थानीय उद्योग की उत्पादक क्षमता में भी बढ़ोतरी हो रही है। स्थानीय ब्रांड्स के मुकाबले बड़ी कंपनियों की मशीनों का बाजार मूल्य बढ़ जाता है।

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पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की और से 17 सितंबर, 2023 को लॉन्च की गई , पीएम विश्वकर्मा योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे पारंपरिक उपकरणों के साथ काम करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को व्यापक सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

क्या है इसका उद्देश्य?

इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य कौशल विकास और आधुनिक तकनीक प्रदान करके भारत के पारंपरिक कला रूपों को बदलना है। 
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किसे मिलेगा इस योजना का फायदा?

यह योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों में काम करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करती है, जिनमें बढ़ई (सुथार/बधाई), नाव निर्माता, शस्त्र निर्माता, लोहार (लोहार), हथौड़ा और टूल किट निर्माता, ताला बनाने वाला, सुनार (सोनार), कुम्हार (कुम्हार), मूर्तिकार (मूर्तिकार, पत्थर तराशने वाला), पत्थर तोड़ने वाला, मोची (चर्मकार)/जूता बनाने वाला/जूते कारीगर, राजमिस्त्री, टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर, गुड़िया और खिलौने निर्माता (पारंपरिक), नाई (नाई), माला निर्माता (मालकार), धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के जाल निर्माता शामिल हैं।
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