देश के किसी भी आर्मी स्कूल में सिविलियन स्टूडेंट्स के लिए किसी भी तरह का कोई रिज्रवेशन नहीं है, जो सीटें खाली रह जाती हैं उनपर लोकल बच्चों को दाखिला दे दिया जाता है। राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने बताया।
साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि सत्र 2017-18 में दाखिले के लिए 7 वीआईपी रेफरेंस आए हैं जबकि 2016-17 में 12 वीआईपी रेफरेंस आए थे जिनमें से 4 को दाखिला दिया गया था।
उन्होंने ये भी बताया कि 2015-16 में इन स्कूलों में दाखिले के लिए 26 वीआईपी रेफरेंस आए थे जिनमें से 4 को दाखिले की मंजूरी दी गई थी और 22 को सीट न उपलब्ध होने की वजह से दाखिला नहीं दिया जा सका था।
भामरे ने बताया कि ये स्कूल सरकार द्वारा नहीं चलाए जा रहे थे और डिफेंस में काम करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान था।
रक्षा राज्य मंत्री ने ये भी बताया कि इन स्कूलों में फी स्ट्रकचर भी आर्मी रैंक के आधार पर तय किया जाता था और लोकल बच्चों के लिए आस-पास के प्राइवेट स्कूलों के आधार पर फी तय किया जाता था।