सरकार ने यह भी आशंका जताई कि महामारी के कारण आयु-सीमा में किसी भी तरह की छूट और अनुमेय प्रयासों की संख्या के कारण अन्य श्रेणियों के उम्मीदवारों द्वारा भी इसी तरह की मांग की जा सकती है। यह अन्य उम्मीदवारों की संभावनाओं को भी प्रभावित करेगा जो मौजूदा प्रावधानों के अनुसार पात्र हैं।
सरकार ने कहा है कि इससे पूरे देश में आयोजित अन्य परीक्षाओं के उम्मीदवारों द्वारा भी इसी तरह की मांग की जाएगी। केंद्र सरकार ने कहा कि सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा-2021, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा सात जनवरी, 2022 से 16 जनवरी, 2022 के बीच पूरे देश में 24 केंद्रों पर कोविड -19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी। प्रोटोकॉल के तहत कोविड संक्त्रस्मित उम्मीदवारों के लिए कोई अलग व्यवस्था करने का आदेश नहीं दिया गया था।
डीओपीटी की ओर से यह लिखित प्रतिक्त्रिस्या अरिजीत शुक्ला और अन्य की ओर से दायर याचिका पर आई है। याचिकाकर्ता मुख्य परीक्षा के कुछ पेपर में उपस्थित नहीं हो सके क्योंकि वे कोविड -19 संक्रमित हो गए थे। डीओपीटी ने कहा कि शीर्ष अदालत ने पूर्व में कोविड -19 महामारी के कारण उम्मीदवारों की कठिनाइयों को देखते हुए अतिरिक्त प्रयास की मांग वाली याचिका के खिलाफ फैसला सुनाया था। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत स एक अतिरिक्त प्रयास प्रदान करने की मांग की है क्योंकि अन्य परीक्षाओं में उम्मीदवारों को इसी तरह के विकल्प दिए गए थे। इस मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई हो सकती है।