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India-Pakistan Tension: भारतीय सेना में DGMO कैसे बनते हैं? जानें चयन प्रक्रिया, सैलरी और जिम्मेदारियां

Sun, 11 May 2025 04:02 PM IST
शिवम गर्ग जॉब्स डेस्क, अमर उजाला

सार

DGMO Indian Army: सीजफायर की चर्चाओं के बीच भारतीय सेना के डीजीएमओ का पद एक बार फिर सुर्खियों में है। आइए जानते हैं कि DGMO कौन होता है, वह कैसे बनता है, उसकी जिम्मेदारियां क्या होती हैं और उसे कितनी सैलरी मिलती है।
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Director General of Military Operations - फोटो : PIB
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विस्तार
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Director General of Military Operations: भारतीय सेना में डीजीएमओ (Director General of Military Operations) एक बेहद अहम पद होता है, जिसे एक सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल संभालता है। वर्तमान में भारतीय सेना के डीजीएमओ (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई हैं। यह अधिकारी थलसेना प्रमुख (Army Chief) को सीधे रिपोर्ट करता है और सेना, नौसेना तथा वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करता है। इस पद पर तैनात अधिकारी का काम बड़े सैन्य अभियानों की रणनीति बनाना और युद्ध, आतंकवाद रोधी अभियान तथा शांति मिशनों में नेतृत्व देना होता है।

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बीते दिनों जम्मू में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई से छटपटाए पाकिस्तान ने भारत के जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात और राजस्थान में ड्रोन्स के जरिए हमला करने की कोशिश की थी। हालांकि, भारतीय सेना ने डिफेंस सिस्टम की मदद से पाक ने 'नापाक' इरादों को ध्वस्त कर दिया था और सारे ड्रोन्स को नष्ट कर दिया था।

फिलहाल, भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का एलान हो चुका है और शनिवार शाम 5 बजे से दोनों देशों ने संघर्ष विराम की घोषणा की थी। हालांकि शनिवार देर रात पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उलंघन किया गया, जिसका भारतीय सेना ने मुहतोड़ जवाब दिया।
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सीजफायर की चर्चाओं के बीच भारतीय सेना के DGMO (Director General of Military Operations) का पद एक बार फिर सुर्खियों में है। आइए जानते हैं कि DGMO कौन होता है, इस पद पर कैसे चयन होता है, जिम्मेदारियां क्या होती हैं और कितनी सैलरी मिलती है।

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DGMO कैसे बनते हैं?

डीजीएमओ बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार को भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में NDA, CDS या अन्य रक्षा प्रवेश परीक्षाओं के जरिए प्रवेश लेना होता है। इसके बाद लंबे सैन्य करियर, रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व कौशल और विशेष सैन्य प्रशिक्षण के आधार पर अधिकारी को प्रमोशन के माध्यम से लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचना होता है।

डीजीएमओ की नियुक्ति रक्षा मंत्रालय और सेना प्रमुख द्वारा की जाती है और यह पूरी प्रक्रिया अत्यधिक चयनात्मक और प्रतिस्पर्धी होती है। केवल वे अधिकारी जो अपनी सेवाओं में असाधारण प्रदर्शन करते हैं, उन्हें इस प्रतिष्ठित पद के लिए चुना जाता है।

DGMO की जिम्मेदारियां क्या होती हैं?

डीजीएमओ का मुख्य कार्य भारतीय सेना के सैन्य अभियानों की योजना बनाना और उन्हें क्रियान्वित करना होता है। इसके अलावा ये अधिकारी नियंत्रण रेखा (LOC) पर तनाव कम करने, गोलीबारी रोकने, सैन्य खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने और सेना को उच्चतम स्तर की तैयारी में बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

DGMO की सैलरी कितनी होती है?

डीजीएमओ, जो कि लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता है, को 7वें वेतन आयोग के अनुसार बेसिक वेतन 1,82,200 रुपये से 2,24,100 रुपये प्रतिमाह मिलता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के भत्ते, जैसे कि मकान, मेडिकल, परिवहन और उच्च जोखिम भत्ते मिलते हैं। कुल मिलाकर DGMO की मासिक सैलरी 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है।
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