सच और ईमानदारी का साथ अच्छे नतीजे देता है भले ही नतीजा मिलने में वक्त लगे, यह बात गांव देवलसा में रहने वाले रवि कुमार की जिंदगी की हकीकत बनी, जिन्होंने सिविल सेवा के सफल मेधावियों की सूची में 184वीं रैंक हासिल की है।
इलाहाबाद में लेखा परीक्षक अधिकारी के पद पर काम कर रहे रवि सोमवार को बेलहर विकास खंड स्थित अपने गांव पहुंचे तो स्थानीय लोगों को उनके आईएएस बन जाने की जानकारी मिली। अमर उजाला से बातचीत में रवि ने बताया कि 2007 में बैंक क्लर्क की नौकरी के लिए लिखित परीक्षा पास कर ली थी।
लखनऊ में साक्षात्कार से पहले एक मध्यस्थ से सामना हुआ, जिसने फाइनल सलेक्शन के लिए छह लाख रुपये की मांग रखी। रवि कहते हैं कि घूस की शर्त नकार दिया। घर लौटने पर यह वाकया बताया तो किसान पिता रामचंदर और मां ज्ञानमती ने ईमानदारी और मेहनत से आगे की पढ़ाई पर ध्यान लगाने की सीख दी।
बीकॉम की डिग्री लेने के बाद अपने चाचा श्रीकांत यादव की सलाह पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इलाहाबाद चले गए। 2013 में एसएससी की परीक्षा पास करके इलाहाबाद में बतौर लेखा परीक्षक अधिकारी नौकरी की शुरुआत कर दी।
नौकरी के साथ सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी। पिछले साल लिखित परीक्षा पास करके सिविल सेवा के लिए साक्षात्कार तक पहुंचने का मौका मिला, जबकि इस दफा के नतीजे रवि के लिए पूरी कामयाबी की खबर लेकर आए।