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मिलकर करते थे ये धंधा, बनाते थे करोड़ों रुपये...तरीका जानकर दिल से बद्दुआ निकलेगी

Tue, 10 Apr 2018 01:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एचएसएससी भर्ती घोटाला
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मिलकर करते थे धंधा और करोड़ों रुपये बनाते थे, पर नतीजा अब भयानक निकला और तरीका जानेंगे तो दिल से बद्दुआ ही निकलेगी। मामला है नोट के बदले सरकारी नौकरी। सीएम उड़नदस्ते को इसकी शिकायतें मिल रही थीं। कार्रवाई करते हुए फ्लाइंग स्कवॉड ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) में पैसे लेकर नौकरी के लिए चयनित कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए रिश्वत लेकर रिजल्ट (डाटा) में हेरफेर करने में संलिप्त आयोग की गोपनीय शाखा (सीक्रेट ब्रांच) के कर्मचारियों व अन्य समेत आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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पंचकूला पुलिस ने सेक्टर-पांच थाने में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। जांच के बाद इस पूरे खेल में शामिल मिले- सुभाष पराशर अधीक्षक, रोहताश शर्मा सहायक, सुखविंद्र सिंह सहायक, अनिल शर्मा सहायक, पुनीत सैनी आईटी सैल में अनुबंध कर्मचारी के साथ ही कर्मचारी चयन आयोग को पूर्व में कर्मचारी उपलब्ध कराने वाले धर्मेंद्र सहित बलवान सिंह लिपिक हुडा व सुरेंद्र कुमार सहायक सिंचाई विभाग, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इन आठों पर विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए दस्तावेजों में फेरबदल, कंप्यूटर डाटा में छेड़छाड़ और बिचौलियों की मदद से नौकरी दिलवाने के नाम पर रिश्वत लेने के भी आरोप हैं। जांच टीम के अनुसार, एचएसएससी की सीक्रेट ब्रांच को लेकर पहले भी शिकायतें मिल चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। कार्रवाई के दौरान ब्रांच से संबंधित सभी दस्तावेजों को खंगालने के बाद स्कवॉयड ने सीपीयू, पैन ड्राइव सहित धांधली के लिए इस्तेमाल सभी दस्तावेजों को भी कब्जे में ले लिया है।
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आरोप है कि कर्मचारियों ने बिचौलियों की मदद से विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए रिजल्ट में हेरफेर करने के लिए लाखों की रकम भी उम्मीदवारों से ऐंठने के बाद धांधली में लिप्त रहे। एचएसएससी की ओर से आयोजित मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर्स और ड्राइवर सहित अन्य पदों के लिए नियुक्ति के लिए रिजल्ट में हेरफेरी का काम सीक्रेट ब्रांच के कर्मियों की मिलीभगत से चल रहा था। इस मामले की शिकायत पर सीएम फ्लाइंग स्कवॉयड ने आरोपी कर्मियों सहित दो बिचौलियों को भी गिरफ्तार कर लिया है।

सीक्रेट ब्रांच के कर्मियों ने ही की धांधली

एचएसएससी भर्ती घोटाला
चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी विभाग के जिस ब्रांच की जिम्मेवारी जानकारियों को गोपनीय रखने की होती है, उसी ब्रांच के कर्मियों की मिलीभगत से प्रदेश के सैकड़ों युवाओं को मिलने वाली नौकरी के साथ खिलवाड़ किया गया।

सीक्रेट ब्रांच के दस्तावेज समेत इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी लिया कब्जे में
सीएम फ्लाइंग स्कवॉयड ने इस बारे में मिली शिकायत के आधार पर एचएसएसपी के दफ्तर के सीक्रेट ब्रांच में सर्च की शुरुआत की। पूरे दिन ब्रांच के कर्मियों से पूछताछ और विभिन्न परीक्षाओं और सैकड़ों उम्मीदवारों से संबंधित दस्तावेज खंगाला। इसके बाद अनियमितता में इस्तेमाल दस्तावेज, डाटाबेस, पैन ड्राइव, सीपीयू सहित ब्रांच में इस्तेमाल होने वाले तमाम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को भी कब्जे में ले लिया है।

लंबी हो सकती है आरोपियों की फेहरिस्त
सीएम फ्लाइंग स्कवॉयड ने इस मामले की शिकायत मिलने के बाद से ही आरोपियों पर नजर रखना शुरू कर दिया। हिरासत में लेने के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है कि इस धांधली में और कौन कौन शामिल हैं। सभी आरोपियों के कॉल रिकॉड्र्स भी पुलिस खंगाल रही है, जिससे धांधली के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। इस धांधली के नेटवर्क में और कौन कौन शामिल हैं, इसका सुराग हासिल करने में स्कवॉड जुटी हुई है। माना जा रहा है कि इस मामले में आरोपियों की फेहरिस्त और लंबी हो सकती है।

इन धाराओं के तहत दर्ज किया गया मामला
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में भ्रष्टाचार विरोधी जीरो टॉलरेंस पॅलिसी का दृढ़ता से पालना करते हुए  मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने इस खेल का खुलासा करने के साथ ही भ्रष्टाचार केपूरे मामले को उजागर करने के लिए मुकदमा संख्या 189 पंजीकृत किया है। इसे धारा 166, 167, 420, 465, 467, 468, 471, 120-बी भादसं, 7/8/10/12/13/13(1)/15 भ्रष्टाचार अधिनियम व 66, 72 आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है।

शिकायत मिलने पर सेक्टर-दो स्थित एचएसएससी के दफ्तर पर सीएम उड़नदस्ते ने छापा मारा। इस दौरान अनियमितता में लिप्त आरोपियों से पूछताछ के अलावा सभी संबंधित दस्तावेज, सीपीयू सहित अन्य जरूरी उपकरणों को भी कब्जे में लेकर छानबीन जारी है। इस मामले में फिलहाल आठ लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। इनमें छह सीक्रेट ब्रांच के हैं जबकि दो अन्य भी हैं।
- धीरज सेतिया-एसपी, सीएम, फ्लाइंग स्कवॉड

जींद में भी उड़नदस्ते ने एक को किया काबू
सीएम उड़नदस्ते ने जींद में भी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की भर्तीयों में भोलेभाले युवाओं को बहलाकर पैसे लेने के आरोप में सुरेश कुमार को काबू किया है। सुरेश गांव बडनपुर जिला जींद में जूनियर लेक्चरर के पद पर तैनात है। ये भी मोबाइल के माध्यम से दलालों से जुड़कर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग व केंद्र सरकार की नौकरियों में उम्मीदवारों का चयन करवाने के लिए पर पैसे लेता था। इसे थाना शहर नरवाना पुलिस ने गिरफ्ततार किया है। यह इस षड़यंत्र में उसके साथ अन्य लोग भी शामिल हैं। सुरेश से पूछताछ की जा रही है। उसे न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड लेगी।

स्कवॉड ने एचएसएससी से दो और सीपीयू किए बरामद

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : amar ujala
एचएसएससी में नौकरी के नाम पर लाखों के खेल में संलिप्त आरोपियों से हुए खुलासे के बाद सीएम फ्लाइंग स्कवॉड ने एक बार फिर सेक्टर-दो स्थित एचएसएससी दफ्तर में छानबीन की। टीम ने दफ्तर से दो सीपीयू सहित कुछ और अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। हालांकि इस मामले के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस सभी पहलुओं को खंगाल रही है ताकि अब तक गिरफ्त से बाहर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके।

नौकरी के लिए इंटरव्यू में नंबर बढ़वाने, ट्रांसफर और पोस्टिंग के मुताबिक अलग-अलग रेट पर उम्मीदवारों के साथ सौदा करने वाले एक आरोपी की पुलिस पहचान कर चुकी है। पूरे प्रदेश भर में इस रैकेट के तहत उम्मीदवारों को जाल में फंसाकर आरोपियों के संपर्क में लाने वाले इस आरोपी की कॉल रिकॉर्ड भी पुलिस के पास है। आरोपी को गिरफ्तार करने की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस का दावा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

छोटी मछलियां निशाने पर, कई अभी भी फरार
आरोपियों से पुलिस ने चार सीपीयू, लैपटॉप, पैन ड्राइव सहित कई अहम दस्तावेज बरामद किए। चार दिनों के रिमांड के दौरान आरोपियों ने कुछ छोटे कर्मियों और अधिकारियों के नाम का तो खुलासा कर दिया है। लेकिन, अभी भी इस मामले में कई बड़े अधिकारियों और बिचौलियों का सुराग हासिल करने में पुलिस जुटी हुई है। माना जा रहा है कि इस नेटवर्क में कई बड़े नाम भी हैं, लेकिन उन तक पहुंचने से पहले सभी पहलुओं को पुख्ता करने में टीम जुटी हुई है।

रिश्तेदारों के खाते के जरिये आरोपी करते थे ट्रांजैक्शन
अब तक की पूछताछ में जितने नाम का खुलासा हुआ है, सीएम फ्लाइंग स्कवॉड उसे पुख्ता करने में जुटी हुई है। गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों के साथ-साथ पुलिस उनकी संपत्ति और विभिन्न बैंकों के खाते भी खंगाल रही है। कुछ महीनों में लखपति और करोड़पति कैसे बने, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। उधर, सोमवार को बैंकों में आरोपियों के खाते भी खंगाले गए। हालांकि आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर अधिकतर ट्रांजैक्शन किए हैं, जिसकी छानबीन में टीम जुटी हुई है।

सीपीयू के डाटा से खुलेगा एचएसएससी घोटाले का राज

एचएसएससी भर्ती घोटाला
बरामद सीपीयू से डाटा खंगालने में पुलिस को काफी वक्त लग सकता है। चार सीपीयू से डाटा की बरामदगी में कुछ मुश्किलें भी पेश आ रही हैं, क्योंकि इनमें से कुछ डाटा डिलीट भी किया गया हैं। डाटा रिट्रीव करने के लिए इन्हें फॉरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि अब तक जिन परीक्षाओं में धांधली का खुलासा हो चुका है उनमें ड्राइवर, क्लर्क, एमपीएचडब्ल्यू, जेई पदों पर नियुक्ति में रिश्वतखोरी का खेल चला। अब, टीम इस बात को भी खंगालने में जुटी है कि आरोपियों का गैंग कब से सक्रिय था और अब तक कितने उम्मीदवारों से रुपये वसूले गए।

30 लोगों से पुलिस करेगी पूछताछ
एचएसएससी घोटाला मामले में पुलिस 30 अन्य लोगों से पूछताछ करेगी। एचएसएससी की ओर से आयोजित परीक्षाओं में चयन के लिए आरोपियों ने जिनसे लाखों रुपये लिए हैं उनसे भी पूछताछ होगी। सीएम फ्लाइंग स्कवॉड ने कॉल रिकॉर्ड के आधार पर एचएसएससी में छापेमारी कर, आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लेकिन, आरोपियों ने जिन उम्मीदवारों और बिचौलियों से इस दौरान बातचीत की, उन सुबूतों के आधार पर अन्य लोगों से भी पूछताछ होगी। रिमांड के दौरान आरोपियों से होने वाले खुलासे के बाद पुलिस अन्य आरोपियों से इस गोरखधंधे का खुलासा करेगी।

सिर्फ भर्ती धांधली नहीं ट्रांसफर पोस्टिंग के भी बयाने लेते थे आरोपी
हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन में भर्ती धांधली की स्क्रिप्ट दो साल पहले लिख दी गई थी। जिस पर अमल करीब एक साल पहले शुरू  हुआ। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों के तार चंडीगढ़ सचिवालय से जुड़े भी जुड़े थे। जांच में इस बात की भी पुष्टि हो चुकी है। मालूम हो कि चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय में सभी बड़े अधिकारी और ब्यूरोक्रेसी के टॅाप लोग बैठते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जिन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

उनमें से कुछ आरोपियों की मोबाइल लोकेशन आमतौर पर चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय में भी पाई गई है। नौकरियों में धांधली के अलावा आरोपियों का ट्रांसफर पोस्टिंग के कार्यों में भी दखल था। इस कार्य में कुछ सुपरिंटेंडेंट स्तर के अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। जिनकी तलाश जारी है। जल्द ही पुलिस इस मामले को लेकर प्रदेश में कई ठिकानों पर छापेमारी करेगी। शनिवार को पुलिस की कुछ टीमों ने फरीदाबाद और हिसार में छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है।

इस कार्रवाई केदौरान कई सीपीयू और हार्ड डिस्क बरामद हुई हैं। आरोपियों के और करीबियों के ठिकानों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस को अभी तक जो डाटा मिला है उसमें से कुछ हार्ड डिस्क और सीडी मधुबन स्थिल फारेंसिक लैब में भेजी जाएंगी। मधुबन स्थित फारेंसिक लैब में जांच के बाद यह तय होगा कि आरोपियों की घुसपैठ साफ्टवेयर के माध्यम से किन रिजल्ट तक थी।

 

ऐसे चलता था भर्ती धांधल का धंधा

एचएसएससी भर्ती घोटाला
-पुनीत का दखल पूरे डाटा में रहता था, रिकार्ड तैयार करने के समय वह मौजूद रहता था
-रिकार्ड में टैंपरिंग का जिम्मा रोहताश का था वह सभी आईडी और पासवर्ड का एक्सपर्ट था
-सुभाष शर्मा के जिम्मे रोल नंबर का काम था। जो नंबर इसके पास नोट होते थे उन अभ्यर्थियों से इसकी बात होती थी।
-सुखविंदर कांफिडेंशियल फाइलों की निगरानी करता था। विभाग की हर गोपनीय फाइल उसके संज्ञान में होती थी
-बलवान शर्मा की जिम्मेदारी उन आवेदकों का पता लगाने की थी जो नौकरी की चाहत रखते थे

‘बड़े खिलाड़ियों’ की तलाश, खंगाले जाएंगे आरोपियों के ब्यूरोक्रेट लिंक
एचएसएससी भर्ती घोटाले में एसआईटी आरोपियों के ब्यूरोक्रेट लिंक भी खंगालेगी। इस बात की आशंका से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि ये आरोपी बिना किसी बड़ी ताकत के इस खेल को बेखौफ खेल रहे थे। इसलिए एसआईटी ने अब इस भर्ती घोटाले के ‘बड़े खिलाड़ियों’ की तलाश शुरू कर दी है। एसआईटी की प्राथमिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि  इस गंदे खेल में एक बेनाम सेक्रेटरी भी है, जो भर्ती के लिए ली जाने वाली रिश्वत का रेट कम करने का मादा रखता था। इस बात का जिक्र खुद एक आरोपी ने भी किया है। इसी बात से एसआईटी को इस बात की संभावनाएं प्रबल लग रही है कि इस खेल में कई ब्यूरोक्रेट भी शामिल हो सकते हैं। इसे लेकर एसआईटी ने अभी फिलहाल कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। एसआईटी के अनुसार इस मामले में हर पहलु की जांच की जा रही है।

सेक्रेटरी तक भी पहुंचेगी एसआईटी
एसआईटी के पास मौजूद सुबूत में आरोपी बलवान से एक व्यक्ति ग्रिड सब स्टेशन ऑपरेटर की भर्ती के रेट के बारे में पूछता है। बलवान ने उस व्यक्ति से कहा कि ‘अगला बंदा’ एक कैंडिडेट के साढ़े पांच से छह लाख रुपये मांग रहा है। इसके बाद आरोपी बलवान उस व्यक्ति से कह रहा है कि ‘यदि मैं सेक्रेटरी से बात करूं तो शायद 5 लाख रुपये में मान जाए।’ अब एसआईटी को उस ‘अगले बंदे’ और ‘सेक्रेटरी’ की तलाश है, जो भर्ती के रेट तय करता है और उसे कम करने की भी पॉवर रखता है। एसआईटी यह जानना चाहती है कि आखिरकार यह सेक्रेटरी कौन से विभाग का है और कौन है?

आसानी से लीक हो जाते थे गोपनीय दस्तावेज

एचएसएससी भर्ती घोटाला
हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन की गोपनीय शाखा का कामकाज ‘गोपनीय’ नहीं है। भर्ती से संबंधित इस शाखा में सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज, मेरिट लिस्ट और फाइनल रिजल्ट संबंधी दस्तावेज पूरी तरह गोपनीय रखने होते थे। लेकिन हैरानी की बात यह कि एचएसएससी की गोपनीय शाखा से गोपनीय दस्तावेज बड़ी आसानी से लीक कर दिए जाते थे। इससे भी बड़ी हैरानी की बात यह कि इस एचएसएससी की महत्वपूर्ण शाखाओं में  कुछ कर्मचारी तो अनुबंध आधार पर रखे गए हैं।

इतने अहम विभाग के महत्वपूर्ण दस्तावेजों में ये अनुबंध कर्मी आराम से छेड़छाड़ करते थे। अब सीएम फ्लाइंग स्कॉवड ने जिन आरोपियों को इस भर्ती घोटाले में धरा है, उसमें नियमित  के साथ-साथ अनुबंध कर्मी भी शामिल हैं। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में इस बात का खुलासा किया है कि भर्तियों के लिए ये आरोपी कर्मचारी विभिन्न दलालों से संपर्क में रहते थे। ये दलाल नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों से संपर्क करते थे और फिर उनसे सेटिंग कर एचएसएससी के इन कर्मचारियों से नौकरी दिलवाने के नाम पर सौदेबाजी करने की डील करते थे।

इसी डील के दौरान यदि गोपनीय ब्रांच से किसी दस्तावेज की मांग दलाल व अन्य व्यक्तियों द्वारा की जाती थी, तो आरोपी कर्मचारी बेखौफ एचएसएससी की गोपनीय दस्तावेजों में न केवल छेड़छाड़ कर उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को व्हाट्सअप पर आगे लीक कर देते थे। एचएसएससी में ये काम कई बाबुओं के साथ मिलकर चलता था, ये बाबू लोग भी इस कांड में फंसे हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में ये भी सामने आया है कि  लिखितपरीक्षा तो उम्मीदवार खुद देता था।

लेकिन भर्ती घोटाले में सौदेबाजी इंटरव्यू में अच्छे अंक लगवाने के लिए होती थी। मेरिट में शामिल होने के लिए कुछ अंक इंटरव्यू के होते थे।  उम्मीदवार इंटरव्यू में अपने अच्छे अंक अर्जित कर लें, उसके लिए वे दलालों के हत्थे चढ़ जाते थे। दलाल भी एचएसएससी के इन कर्मचारियों से इंटरव्यू में अच्छे अंक दिलवाकर उम्मीदवारों के नाम मेरिट सूची में शामिल करवाने के लिए उन्हें मोटी रिश्वत दिलवाते थे और उसमें से अपना  भी मोटा कमीशन खाते थे।

पंचकूला जल रहा था और एचएसएससी में चल रहा था गोरखधंधा

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : google
हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन का भर्ती घोटाला सरकार के कानों में बहुत देर में पहुंची। यह पूरा गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन कमीशन के अन्य स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी। 25 अगस्त को जिस दिन डेरा प्रमुख की पंचकूला में पेशी थी। उस दिन कर्फ्यू के हालात में भी स्टाफ सलेक्शन के कार्यालय में काम चल रहा था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनमें से कुछ लोग उस दिन भी कमीशन के कार्यालय में मौजूद थे।

इन लोगों की मोटरसाइकिलें भी दंगे के दौरान जलीं, लेकिन इन जली मोटरसाइकिलों की रिपोर्ट नहीं की गई, जिससे यह मसला पुलिस तक न पहुंचे। मोटरसाइकिल जलने की रिपोर्ट होती तो पंचकूला पुलिस को पड़ताल में यह पूछना पड़ता कि ऐसा कौन सा जरूरी काम था जो सूबे में कर्फ्यू के हालात में इन्हें यहां आना पड़ा। इस डर के कारण ही पुलिस तक यह बात नहीं पहुंची। यह कर्मचारी इस बात को लेकर आश्वस्त हो गए कि पुलिस समझती रही है कि जले हुए सभी मोटरसाइकिल मीडिया कर्मियों के है

और पुलिस ने भी ज्यादा सिरदर्दी नहीं ली। यही नहीं अन्य छुट्टी के दिनों में भी कार्यालय में काम चलता था। जिसकी भनक किसी को नहीं लगती थी। अब भर्ती घोटाले की आंच कमीशन के अफसरों के दामन तक भी आएगी। जो कर्मचारी इस काम को अंजाम दे रहे थे। उनमें से कई ऐसे है जो अधिकारियों के घर का काम कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पा गए। अफसरों की चमचागीरी में अन कर्मचारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

8 ने बनाए 100 शिकार, व्हाट्सएप से करते थे रोल नंबर शेयर

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा स्टाफ सर्विस कमीशन में पैसे लेकर भर्ती कराने वाले गैंग के आठ लोगों के अब तक 100 लोग शिकार हो चुके हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के मोबाइल नंबर लेकर जब उन्हें खंगाला तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इनके फोन से 200 से भी ज्यादा रोल नंबर मिले हैं जो इन्होंने व्हाट्सएप के जरिये एक-दूसरे के साथ शेयर कर रखे हैं। पुलिस की अब तक की जांच में पता चला है कि जितने रोल नंबर आरोपियों के मोबाइल से मिले हैं, उनमें से आधे इनकी कमाई का जरिया रहे।

यानी आरोपियों ने 100 युवाओं को शिकार बनाया है। मोबाइल रिकवर होने के अलावा पुलिस ने चार लैपटॉप भी बरामद किए हैं। दो लेपटॉप आरोपी पुनीत के हैं, जो कि एचपीएससी की आईटी विंग में तेनात था और दो लैपटॉप अनिल से मिले हैं। मोबाइलों से तो पुलिस ने काफी हद तक रिकार्ड खंगाल लिया है, लेकिन अभी लैपटाप से बरामदगी होना बाकी है। क्योंकि पुलिस भी मानकर चल रही है कि मोबाइल से ज्यादा डाटा लैपटाप में है। अभी तक की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी अक्सर मोबाइल कॉल के अलावा व्हाटसएप से भी कॉल करते थे।

आधार कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद
मामले की जांच कर रही एसआईटी ने दस्तावेजों का भी जखीरा बरामद किया है। जिसमें आधार कार्ड, राशन कार्ड सहित कई दस्तावेज हैं। हालांकि अभी तक सभी दस्तावेज चेक नहीं किए गए, लेकिन प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि दस्तावेज कुछ ऐसे लोगों के हैं, जिन्हें नौकरी लगवाने का वायदे किए गए थे। जो आवेदक इनके झांसे में आता था, उससे दस्तावेज भी लेते थे, ताकि जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव कर सकें।

सभी आरोपियों को रखा गया है अलग-अलग
गिरोह का भंडाफोड़ तो सीएम फलाइंग स्कवॉड ने किया था, लेकिन बाद में जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई, जिसमें पंचकूला पुलिस के अधिकारी भी हैं। अब चूंकि आरोपी पंचकूला पुलिस के पास रिमांड पर हैं, तो सभी आरोपियों को तीन हिस्सों में अलग-अलग क्राइम ब्रांच के हवाले किया गया है। पंचकूला पुलिस की तीन क्राइम ब्रांच आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ कर रही हैं।

गोलमाल में रिश्तेदार भी
पकड़े गए आरोपियों में से दो ने अपने दो रिश्तेदारों को भी नौकरी पर लगवाया। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि जिन रिश्तेदारों को नौकरी लगवाई उनके नंबर कम थे, लेकिन किसी अन्य आवेदक के नंबरों को टेंपर कर अपने लोग भर्ती करा दिए गए।

कम अंक पर भी सौ फीसदी गारंटी देते थे घोटालेबाज

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन की विभिन्न नौकरियों में धांधली मामले का सियासी लिंक भी सामने आया हैं। एसआईटी को पूरा अंदेशा है कि  इस मामले में आला अफसरों की मिलीभगत के साथ-साथ कुछ बड़े सियासी लोग भी शामिल हैं। इतना ही नहीं एसआईटी की प्रारंभिक जांच में इस बात का खुलासा भी हुआ है। एसआईटी के पास भर्ती धांधली को लेकर अभी तक जो सुबूत मौजूद हैं, उसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि एक आरोपी बलवान ने नारनौंद के एक पूर्व विधायक के मोबाइल नंबर पर बातचीत कर कम अंक के बावजूद भर्ती करवाने में पूरा प्रयास करने का आश्वासन दिया है।

एसआईटी के अनुसार आरोपी ने पूर्व विधायक के मोबाइल नंबर पर जिस व्यक्ति से बातचीत की, वे उसे फूफा जी कहकर उससे बातचीत कर रहा है। इसी आधार पर एसआईटी ने दावा किया है कि इस भर्ती घोटाले में सियासी लिंक से इंकार नहीं किया जा सकता। अब एसआईटी इस लिंक को भी खंगालने में जुट गई है। एसआईटी सूत्रों के अनुसार पूर्व विधायक के मोबाइल नंबर पर व्यक्ति ने आरोपी बलवान से एक मुकेश आहूजा व एक अन्य रिश्तेदार की इंटरव्यू में सेटिंग करने की बात कही।

तो बलवान ने उस व्यक्ति से कहा कि संबंधित उम्मीदवार का काम होने के बहुत कम चांस है, क्योंकि इनके नंबर बहुत कम हैं। आरोपी बलवान ने पूर्व विधायक के मोबाइल नंबर पर बात कर रहे व्यक्ति से कहा कि कोई बात नहीं उसके बावजूद वह अपनी तरफ से 100 फीसदी कोशिश करेगा।

सेटिंग करने वालों की धरपकड़ शुरू
एसआईटी ने इस मामले में आरोपियों का रिमांड लेकर उन सैटिंगबाजों की तलाश शुरू कर दी है, जो लोग नौकरियों के लिए इन आरोपियों के संपर्क में थे। नौकरी पाने और रुपये देने तक काफी बातों की मोबाइल रिकार्डिंग एसआईटी के पास है। इसलिए एसआईटी अब हर उस व्यक्ति तक पहुंच रही है, जो इस गंदे खेल का हिस्सा हैं। इसके लिए एसआईटी ने धरपकड़ शुरू कर दी है।

अगर कह दिया तो अगले दिन लिस्ट में होता था नाम
इस धांधली में आरोपी खुद को इतने ज्यादा ताकतवर मानने लगे थे कि सेटिंग के बाद वे इंटरव्यू में अच्छे अंक  लगवाकर कैंडिडेट का नाम सीधे भर्ती होने वाली फाइनल सूची में डाल देते थे। इसका भी सुबूत एसआईटी ने जुटाया है। एक आरोपी अनिल कुमार ने एक व्यक्ति मोबाइल पर कह रहा है कि ‘क्लर्क की लिस्ट लग गई है मेरे पास व्हॉटसअप पर आई है, उसमें मेरे उम्मीदवार का नाम ही नहीं आया।’ इस पर अनिल ने चेक करके  व्यक्ति को बताया कि अभी तक लिस्ट नहीं लगी है, आज लगेगी, तो उसमें अपने कैंडिडेट का नाम देख लेना।’

हरियाणा पुलिस की नई भर्ती पर संकट के बादल

एचएसएससी भर्ती घोटाला
हरियाणा पुलिस में जल्द ही शुरू होने वाली सिपाही व अन्य पदों पर 12 हजार से ज्यादा भर्तियों की प्रक्रिया पर संकट के बादल छा सकते हैं। हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) भर्ती में धांधली के आरोप में पकड़े गए घपलेबाजों के पास से कई ऐसे लोेगों के दस्तावेज मिले हैं जो पिछली पुलिस भर्ती में फेल हो गए थे। पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। हालांकि नई भर्ती में अभी समय है लेकिन इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वभाविक है।

फिलहाल पुलिस ने इस तथ्य से हरियाणा सरकार को अवगत करा दिया है। अब यह सरकार पर निर्भर करता है कि भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया जाएगा या सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा। ड्राइवर, क्लर्क सहित अन्य पदों में चुने गए 100 से ज्यादा लोगों को शिकार बनाने के बाद आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि नई भर्ती शुरू होने से पहले ही शिकार तलाशने लगे थे। वे पिछली भर्ती में फेल हुए उम्मीदवारों से संपर्क करना चाहते थे ताकि नई भर्ती में सेटिंग कर सकें।

हालांकि पंचकूला में स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम के पास रिमांड पर चल रहे आरोपियों ने इस बारे में अभी कुछ खास जानकारी नहीं दी है। टीम ने इसके अलावा एचएसएससी के डाटा सर्वर की कमजोरियों के बारे में भी एक विस्तृत रिपोर्ट हाईकमान को दी है। सूत्रों के मुताबिक कमजोर सर्वर को तुरंत प्रभाव से बदलने के लिए कहा गया है ताकि भविष्य में यह और सुरक्षित हो सके। वहीं जो नतीजे आने वाले दिनों में जारी होने वाले थे, उनको फिलहाल टालने की सलाह दी है।

अन्य बिचौलियों का भी जल्द हो सकता है खुलासा
जांच टीम और इस प्रकरण पर पैनी नजर रखे हुई अफसरशाही ने हरियाणा सरकार को चेता दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या स्टैंड लेती है क्योंकि इस तरह के बिचौलिये अब भी सिस्टम में हैं। उनके बारे में भी जल्द खुलासा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक विभिन्न विभागों के कुछ और कर्मचारी राडार पर हैं, जिनकी जल्द ही जवाबदेही तय की जाएगी।

इंटरव्यू में ज्यादा अंक देकर चहेतों के चयन का भी खूब चला खेल

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : demo pic
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में चहेतों को सरकारी नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गईं। आयोग में कार्यरत स्टाफ के बच्चों के साथ ही पैसे लेकर नौकरी देने के लिए इंटरव्यू में भाई-भतीजावाद की सारी हदें पार कर दी गईं। चहेतों को इंटरव्यू में 17 से 21 अंक दिए गए, जबकि लिखित परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को मात्र छह से 15 नंबर के बीच देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन, सदस्यों और स्टाफ की मंशा पर राजनीतिक दलों और आम आदमी को संदेह इसलिए हो रहा है, चूंकि नगर पालिक सचिव की हाल में हुई नियुक्तियों में इंटरव्यू के दौरान नंबरों की बंदरबांट हुई है। इन भर्तियों में सामान्य श्रेणी के तीन पद थे, जिनमें आयोग के अक्षीक सीक्रेट ब्रांच के बेटे ने इसमें टॉप किया है। उसके लिखित परीक्षा में 174 नंबर थे, जबकि इंटरव्यू में उसे 25 में से 17 नंबर लगाए गए।

लिखित में नंबर अच्छे थे, इसलिए उसका चयन तय माना जा रहा था, मगर लिखित परीक्षा के अंकों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला व रतिया से इनेलो विधायक प्रो. रविंद्र बलियाला का आरोप है कि पंचकूला डेरा सच्चा सौदा हिंसा के दिन इसी पेपर की मार्किंग तीन लोग आयोग कार्यालय में कर रहे थे। इन्होंने लिखित परीक्षा के अंकों में भी गड़बड़ी की है। इस भर्ती में दूसरे नंबर पर बंबूल सिंह रहे, इसके लिखित परीक्षा में डेढ़ सौ अंक थे और उसे इंटरव्यू में 25 में से 21 अंक दिए गए। तीसरे स्थान पर प्रदीप कुमार का चयन हुआ।

उसके डेढ़ सौ अंक लिखित परीक्षा में थे, जबकि इंटरव्यू में 25 में से 20 अंक दे डाले। इस भर्ती पर सवाल इसलिए उठे, चूंकि अजय देशवाल ने लिखित परीक्षा में 162 अंक लिए थे, जिसे इंटरव्यू में मात्र 25 में से 6 अंक दिए गए। इसी तरह विवेक राठी के 152 अंक थे और उसे इंटरव्यू में केवल 12 अंक दिए। इसी तरह आशीष के लिखित परीक्षा में डेढ़ सौ अंक थे, जिसे इंटरव्यू में 15 अंक ही मिले। बीते सप्ताह आयोग में भर्ती घोटाला सामने आने के बाद इस भर्ती पर सबसे अधिक उंगली उठ रही है और अच्छे अंक लेने के बावजूद मैरिट से बाहर हुए अभ्यर्थी उच्च स्तरीय जांच की मांग करने लगे हैं।

पुनीत सैनी पर गंभीर आरोप, दिल्ली भाजपा दफ्तर में थे कार्यरत

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : File
भर्ती घोटाले में पुलिस गिरफ्त में चल रहे पुनीत सैनी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। उन्हें आयोग के चेयरमैन का खासमखास बताया जा रहा है। वह दो साल से आउटसोर्सिंग पर लगे हुए हैं और वेतन भी नहीं ले रहे। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला हिंसा के दौरान आयोग भवन में इनके मौजूद होने की सूचना पुलिस को मिली है। आयोग में आउटसोर्सिंग पर लगने से पहले सैनी दिल्ली भाजपा दफ्तर में काम करते थे।

भर्ती घोटाले में शामिल सुभाष पराशर कमीशन की गोपनीय ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट हैं। आरोप है कि इनका बेटा पेपर खाली छोड़कर आया था फिर भी म्यूनिसिपल सेक्रेटरी बना। इनकी बेटी भी हाल में क्लर्क लगी है। आरोपी रोहताश शर्मा भी आयोग के एक अधिकारी के रिश्तेदार हैं। आरोपी बलवान पर आयोग के एक सदस्य के लिए दलाली करने का आरोप भी लग रहा है।

पुनीत का काम डाटा चुराना, शिकार करते थे दूसरे
हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) की आईटी विंग में तैनात अनुबंध कर्मचारी पुनीत का काम डाटा चोरी करना था और उसके बाद अन्य बिचौलियों से शेयर करना। मामले की जांच कर रही एसआईटी की पूछताछ में पता चला है कि पुनीत आवेदक को कभी-कभार ही कॉल करता था। इस प्रकरण के अन्य आरोपी पुनीत से मिले डाटा से संपर्क करते थे ताकि जिनका चयन नौकरी के लिए होने वाला था, उनसे पैसे ऐंठ सकें।

वहीं पुलिस की जांच पुनीत से रिकवर हुए लैपटॉप पर भी चल रही है क्योंकि इससे वह विभाग के मुख्य सर्वर को एक्सेस कर चुका था। पुनीत एचसीएससी की आईटी विंग में तैनात था। पुलिस अभी तक उसे मुख्य आरोपी मान रही है, क्योंकि वही सर्वर में से आवेदकों का डाटा चोरी करता था। पुनीत ऐसे आवेदकों के नाम सर्वर में से निकालता था, जो पास हो चुके थे। उनकी डिटेल गिरोह के अन्य सदस्यों को देता था।

सभी आरोपियों के बयान किए क्रॉस चेक
मामले की जांच कर रही एसआईटी ने सभी आरोपियों को तीन-तीन की टुकड़ियों में बांटकर अलग-अलग क्राइम ब्रांच में रखा हुआ था। रविवार शाम तक आरोपियों के अलग-अलग बयान दर्ज करने के उन्हें क्रॉस चेक किया गया ताकि बयानों में आ रहा कोई झोल पकड़ा जा सके। एक बात जो सभी के बयान में आ रही है वह पुनीत की डाटा चोरी करने की तकनीक और दूसरा नौकरी के दाम की है। तीन से चार लाख रुपये चालक और दस लाख रुपये क्लर्क के लिए अधिकतम रहे।

इंटरव्यू में 18 नंबरों का रेट 4 लाख, दलाल की कमीशन 50 हजार

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एचएसएससी (हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन) भर्ती घेाटाले में नौकरियां लगवाने के नाम पर जिस तरह की धांधली सामने आई है, उसमें हर तरह की नौकरी के  रेट अलग-अलग फिक्स थे। एसआईटी की प्राथमिक जांच में कुछ पदों के लिए रेट का भी खुलासा हुआ है। जुटाए गए प्रमाणों में ये बात सामने आई है कि विभिन्न पदों के लिए रेट 3 लाख से लेकर 6 लाख तक हैं। उसके बाद बीच में रेट ऊपर-नीचे भी हो जाते थे। इन्हीं रेटों में दलालों की कमीशन भी होती थी।

एसआईटी जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक ये आरोपी खुद तो भर्ती के लिए रिश्वत देने वाले ग्राहक ढूंढते ही थे, लेकिन इसके लिए इनका बड़ा जरिया दलाल होते थे। जो विभिन्न जिलों से ऐसे युवकों की तलाश करते थे, जो भर्ती क्लीयर करवाने के लिए लाखों रुपये देने का मादा रखते थे। पहले दलाल इन युवकों को भर्ती का रेट बताते थे। उसके बाद युवक दलालों को अपनी रिश्वत देने की क्षमता बताते थे। दलाल फिर आरोपियों को युवकों की रिश्वत देने की क्षमता के बारे में बताता है।

उसके बाद आरोपी तय करते हैं कि युवक की क्षमता अनुसार रिश्वत उससे ले लेनी है या नहीं। यदि आरोपियों को लगता है कि संबंधित भर्ती क्लीयर करवाने के लिए संबंधित युवक की रिश्वत क्षमता से ज्यादा रिश्वत कोई दूसरा युवक दे सकता है, तो वे दलालों को मना कर देते हैं और यदि उन्हे लगता है कि इससे ज्यादा रिश्वत नहीं आनी तो वे उस डील को फाइनल कर लेते हैं। एसआईटी द्वारा जुटाए गए तथ्यों के अनुसार बीसी-ए श्रेणी के क्लर्क लगवाने केलिए एक आरोपी 4 लाख रुपये का रेट बताता है।

4 लाख रुपये में आरोपी को संबंधित युवक के इंटरव्यू में 18 अंक देने थे, ताकि वह मेरिट में आ जाए।  इसमें दलाल आरोपी को कहता है कि इसमें 50 हजार रुपये तो उनकी कमीशन भी होनी चाहिए, वे काम करवाए, रुपये का इंतजाम वे करवाता है। इसी तरह के कई और डील के खुलासे भी एसआईटी ने अपनी प्राथमिक जांच में किया है, जिसकी तह तक पहुंचने में एसआईटी अफसर जुटे हुए हैं।

एचएसएससी की विवादित भर्तियां होंगी रद्द!

एचएसएससी भर्ती घोटाला
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती घोटाले की जद में आई नौकरियों पर रद्द होने का खतरा भी मंडरा रहा है। भर्तियों में बड़े पैमाने पर पैसे लेकर नौकरी देने का खेल उजागर होने के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन भर्तियों खासकर नर्स, ड्राइवर, क्लर्क और नगरपालिका सचिव में पैसे लेकर नौकरी देने का खुलासा है, उन्हें सरकार जांच के बाद रद्द कर सकती है। मनोहर लाल सरकार के पास पूरे मामले में पाक-साफ निकलने का यही रास्ता है।

भर्ती घोटाले को लेकर विपक्ष के हमलावर होने से सरकार अंतिम निर्णय पुलिस जांच के बाद लेगी। सूत्रों के अनुसार कर्मचारी चयन आयोग से सरकार ने घोटाले में घिरी भर्तियों की जानकारी भी मांगी है। ताकि सीएम अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श कर उचित निर्णय ले सकें। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर व इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला भर्ती घोटाले को लेकर आक्रामक रुख में हैं। उन्होंने जांच के बाद दागी भर्तियों को रद करने की मांग उठाई है।

सीएम मनोहर लाल पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और डीजीपी के साथ आईजी सीआईडी की तरफ से उन्हें घोटाले की एसआईटी जांच की पल-पल की अपडेट दी जा रही है। घोटाले में रोजना हो रहे नए खुलासों से भी सीएम को ब्रीफ किया जा रहा है। सीएम मनोहर लाल अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार मुक्त भर्तियां करने का दम भरते आए हैं, यह उनका ट्रेडमार्क भी रहा है, इसलिए घोटाले के छींटे वह सरकार के दामन पर नहीं पड़ने देना चाहते। ऐसे में जांच के बाद भर्ती रद्द करने का निर्णय होने से इंकार नहीं किया जा सकता। सचिवालय के गलियारों में भी इसकी चर्चा है।
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सरकारी विभागों में भी घोटालेबाजों का मजबूत नेटवर्क

एचएसएससी भर्ती घोटाला - फोटो : amar ujala
एचएसएससी भर्ती घोटाले में जिन आरोपियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनका नेटवर्क सिर्फ भर्तियों के  गड़बड़झाले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके भ्रष्टाचार की जड़े विभिन्न विभागों तक फैली हुई है। इनमें से कई लोग विभागों में पर्सनल इंटरेस्ट की फाइलें भी आगे बढ़ाकर व उसे क्लीयर करवाने का भी ठेका लेते थे। इस काम में भी भ्रष्टाचार का पूरा खेल खेला जाता था।

एसआईटी द्वारा भर्ती घोटाले में जुटाए गए तथ्यों में इस बात का जिक्र है कि एक आरोपी एक महत्वपूर्ण विभाग से फाइल निकलवाने की बात कह रहा है, तो एक अन्य आरोपी एक विभाग के अकाउंट शाखा के अकाउंटेंट को एक अन्य जिले के विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिलवाने की बात कह रहा है। दरअसल, यह गिरोह ऐसे लोगों की भी तलाश में रहता था, जिनके पर्सनल इंटरेस्ट की फाइलें विभिन्न विभागों में अटकी रहती थी। ऐसे लोगों में विभिन्न विभागों के कर्मचारी, निचले अफसर व अन्य लोग होते थे।

एसआईटी की ओर से जुटाए गए तथ्यों में एक आरोपी से एक व्यक्ति ने मोबाइल पर कहा कि एक फाइल डीजीपी कार्यालय अटकी हुई है, उसे निकलवाना है। इस पर व्यक्ति ने कहा कि इस बारे वह जल्द ही चंडीगढ़ आने का प्रोग्राम बनाता है। इसी दौरान एक अन्य आरोपी की अपने एक मित्र कर्मचारी जो कि स्वास्थ्य महकमे में अकाउंट अफसर है, से बात होती है। मित्र चाहता है कि उसे गुरुग्राम का भी अतिरिक्त चार्ज मिल जाए तो बेहतर होगा।

इस पर आरोपी अपने मित्र से कहता है कि वह उसे अपना विवरण भेज दे, वह जरूर कुछ करेगा। उसके बाद आरोपी ने फिर से अपने अकाउंटेंट मित्र को फोन करके बताया कि उसके काम के लिए दो बड़े प्रभावशाली लोगों से सिफारिश भी करवा दी है। इस पर मित्र ने आरोपी से कहा कि आपकी फीस पक्की, बस आप जैसे-तैसे कर ये काम करवा दो। एसआईटी अब अपनी जांच में इस नेटवर्क को भी खंगालेगी, ताकि भ्रष्टाचार के इस खेल में भी सेंध लगाई जाए।
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