लंबे अरसे के बाद सिविल सेवा के प्रतियोगियों में उत्साह है। सिविल सेवा-2015 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम सोमवार को घोषित हुआ। परीक्षा प्रारूप में हुए बदलाव से हिंदी पट्टी के प्रतियोगियों की बल्ले-बल्ले है।
हालांकि सही आंकड़े तो अभी नहीं आए हैं लेकिन हॉस्टल और डेलीगेसी में उत्साह से साफ नजर है कि इस बार सफल होने वालों की फेहरिस्त लंबी है। इस रिजल्ट से मुख्य परीक्षा और अंतिम रूप से चयनितों की सूची में भी बेहतर परिणाम की उम्मीद जगी है।
प्रारंभिक परीक्षा में 2011 से सीसैट लागू होने के बाद से हिन्दी पट्टी के प्रतियोगियों की सफलता का ग्राफ लगातार गिरता गया। इसके विरोध में प्रतियोगियों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया।
सीसैट लागू होने से पहले जैसी सफलता इस बार नहीं
चौतरफा दबाव बनने के बाद सरकार के फैसले के तहत संघ लोक सेवा आयोग ने इस बार प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट को क्वालीफाइंग कर दिया। यानी, इसके अंक मेरिट निर्धारण में नहीं जोड़े गए। इसका लाभ भी मिलता दिख रहा है।
हालांकि सीसैट लागू होने से पहले जैसी सफलता इस बार भी नहीं है। इसके पीछे मेरिट अधिक होने के साथ बड़ी संख्या में प्रतियोगियों के फार्म नहीं भरने को कारण माना जा रहा है।
इसके बावजूद पहले के मुकाबले बेहतर परिणाम आने से प्रतियोगी उत्साहित हैं और हिंदी पट्टी में इस प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर एक बार फिर सकारात्मक माहौल बनने लगा है। विशेषज्ञों का दावा है कि आगामी वर्षों में और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
लंबे समय बाद उत्साहजनक परिणाम
संघ लोक सेवा आयोग के विशेषज्ञों के पैनल के सदस्य इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर जटा शंकर का कहना है कि सीसैट क्वालीफाइंग होने के साथ सामान्य अध्ययन का पेपर भी ट्रेडिशनल रहा। इसकी वजह से नए प्रतियोगियों को कुछ निराशा मिली है, लेकिन लंबे समय से तैयारी करने वालों को फायदा हुआ।
यहां के प्रतियोगियों की वैकल्पिक विषय में अच्छी नॉलेज होती है। इसलिए मुख्य परीक्षा में और बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा सकती है। विशेषज्ञ डॉ. अतुल मिश्र का कहना है कि इस बार 2011 में शामिल अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका दिया गया था। इसके अलावा सीसैट को क्वालीफाइंग करने के बाद इंजीनियरिंग, मेडिकल की पढ़ाई करने वाले प्रतियोगियों का भी सामान्य अध्ययन पर पूरा फोकस रहा।
इससे मेरिट अधिक होने की बात कही जा रही है। इसलिए अपेक्षित रिजल्ट नहीं रहा लेकिन उत्साह बढ़ाने वाला जरूर है। सिविल सेवा कोच रनीश जैन का कहना है कि लंबे समय बाद उत्साहजनक परिणाम आया है। इसका असर मुख्य परीक्षा और अंतिम परिणाम में भी निश्चित देखने को मिलेगा।
इलाहाबाद से सफल हुए 500 से अधिक अभ्यर्थी
सीसैट लागू होने से पहले इलाहाबाद से 50 से अधिक अभ्यर्थी सिविल सेवा में अंतिम रूप से चयनित होते रहे। 2009 में तो 76 अभ्यर्थी सफल हुए थे। प्रारंभिक परीक्षा पास करने वालों की संख्या तो एक हजार से भी अधिक होती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह संख्या काफी कम हो गई।
यहां के प्रतियोगी प्रारंभिक परीक्षा की बाधा ही नहीं पार कर पा रहे थे और यह संख्या 200 से 250 के बीच सिमट कर रह गई थी। सीसैट को क्वालीफाइंग पेपर करने के बाद इस बार के रिजल्ट में सुधार हुआ है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ज्यादातर हॉस्टलों में उत्साह का माहौल है।
हॉस्टल, डेलीगेसी तथा कोचिंग संस्थानों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार इलाहाबाद से 500 से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा पास की है। मनीष चौरसिया, एकता वर्मा, शंभू प्रसाद, राजीव कुमार, राकेश सिंह, रोहित माथुर, प्रज्ञान राय आदि सफल होने वालों की सूची में शामिल हैं।