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Career Tips: रोजमर्रा की जिंदगी से सिखाएं; एक अच्छा लीडर वही है, जो अनुभवों का सहारा लेकर गहरी सीख दे सके

Sat, 08 Nov 2025 10:52 AM IST
आकाश कुमार रुचिरा चौधरी, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Tips: जब लीडर अनौपचारिक बात करते हैं, जैसे-मीटिंग के बाद दो मिनट का सुझाव, सफर के दौरान किसी को मार्गदर्शन देना या ऑनलाइन संदेश भेजना है, तो ये छोटे-छोटे कार्य कोचिंग के ही रूप हैं। कुछ सबसे असरदार कोचिंग उन छोटे, अनपेक्षित पलों में होते हैं, जो बिना किसी तैयारी के हो जाते हैं। 
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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Tips: कई लीडर्स को लगता है कि कार्यस्थल पर कोचिंग (प्रशिक्षण) एक बड़ी, जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, लेकिन असल में कोचिंग रोजमर्रा की छोटी, सरल बातचीत में भी हो सकती है। यह कोई तय नियमों वाला कठिन ढांचा नहीं है। जब लीडर अनौपचारिक बात करते हैं, जैसे-मीटिंग के बाद दो मिनट का सुझाव, सफर के दौरान किसी को मार्गदर्शन देना या ऑनलाइन संदेश भेजना है, तो ये छोटे-छोटे कार्य कोचिंग के ही रूप हैं। ऐसे सहज और वास्तविक संवाद टीम के लोगों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, उनके काम को लेकर स्पष्टता देते हैं और उनकी क्षमता को बेहतर बनाते हैं।

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Career Tips - फोटो : freepik

अनपेक्षित पलों का लाभ उठाएं

कुछ सबसे असरदार कोचिंग उन छोटे, अनपेक्षित पलों में होते हैं, जो बिना किसी तैयारी के हो जाते हैं। यह सिर्फ सलाह देने के बारे में नहीं, बल्कि ऐसे सवाल पूछने के बारे में है, जो सामने वाले को खुद सोचने और जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करें। इसे 'पॉपकॉर्न कोचिंग' कहा जाता है, क्योंकि ये मौके अचानक मीटिंग के बाद या व्हाट्सएप चैट में होते हैं और कुछ मिनट ही चलते हैं। लीडर का काम इन पलों को पहचानना, सवाल पूछना और लोगों को सोचने और आगे बढ़ने में मदद करना।

Career Tips (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik

अनुभव साझा करें

जब नई प्रतिभाएं लीडर्स को काम करते हुए देखती हैं, तो वे उनका तरीका, सोच और व्यवहार समझते हैं। मीटिंग से पहले अगर लीडर उन्हें ध्यान देने की कोई खास बात बता दें और बाद में कुछ मिनट बात करके पूछें कि इससे क्या ध्यान में आया या वे क्या अलग कर सकते हैं, तो सामान्य अनुभव एक सीख में बदल जाता है। यह प्रक्रिया उन्हें आत्मविश्वास देती है, कौशल विकसित करती है और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करती है।

Career Tips (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik

जुड़ाव बढ़ाने का प्रयास करें

लीडर सिर्फ सलाह देकर ही नहीं, बल्कि लोगों को सही अवसरों और सही विशेषज्ञों से जोड़कर भी कोचिंग देते हैं। ऐसें लीडर अपनी टीम को उन लोगों तक पहुंचाते हैं, जो किसी कौशल को बेहतर तरीके से सिखा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, जब एक वरिष्ठ लीडर अपनी टीम के एक प्रतिभाशाली सदस्य को कंपनी के प्रभावशाली मेंटर से मिलवाते हैं, तो मेंटर उनकी क्षमता पहचानते हैं और उन्हें बड़े कामों में शामिल होने का मौका देते हैं। इसका लाभ उन्हें कुछ ही वर्षों में पदोन्नति दिला सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

गेम्बा कोचिंग है कारगर

गेम्बा का मतलब है वह असली जगह जहां काम वास्तव में होता है। गेम्बा कोचिंग का मकसद लोगों की सोच को समझना और उन्हें उसी समय उनके असली काम के दौरान बेहतर फैसले लेने में मदद करना है। गेम्बा कोचिंग के तहत लीडर यह पूछते हैं कि आपने अमुक कदम क्यों उठाया? इस प्रशिक्षण का उद्देश्य है कि अपने निर्णयों के छोटे-छोटे पहलू के प्रति भी सजग व सतर्क बन सके।
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