बता दें कि 9 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 2011 से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ टीईटी योग्यता प्रमाणपत्रों की वैधता को सात साल से बढ़ाकर जीवन भर के लिए कर दिया। राज्य सरकारों को नए नियम का पालन, नए प्रमाण पत्र जारी और तय अवधि के लिए उन प्रमाणपत्रों को फिर से सत्यापित करने के लिए कहा गया था, जो सात साल पहले ही समाप्त हो चुके हैं।
इसके बाद, बिहार सरकार ने 2012 से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ टीईटी प्रमाणपत्रों की वैधता को जीवन भर के लिए बढ़ा दिया है। राज्य में पहला टीईटी प्रमाण पत्र मई 2012 में जारी किया गया था। भविष्य में जारी होने वाला टीईटी प्रमाण पत्र भी इसी तरह जीवन भर के लिए मान्य होगा।
वहीं उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने भी शासमन को यूपीटीईटी को आजीवन मान्य करने के संबंध में प्रस्ताव भेजा है। बता दें कि वर्ष 2011 में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के बाद पहली बार अध्यापक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया गया था। उसके बाद से ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी द्वारा परीक्षा आयोजित की जाने लगी। उत्तर प्रदेश में पहले प्रमाण पत्र की वैधता की अवधि पांच साल हुआ करती थी।