दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के बीच एक और शिगूफा छूट रहा है। यह शिगूफा है सातवें वेतन आयोग में मिलने वाले संभावित वेतनमान का।
इस समय सोशल साइटों पर सातवें वेतन आयोग के संभावित वेतनमान से संबंधित एक टेबल भी खूब शेयर किया जा रहे हैं जिसमें छठे वेतन आयोग का वेतनमान सातवें वेतन आयोग के संभावित वेतनमान की तुलना है।
मतदाताओं को बताया जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट इसी साल आ रही है और रिपोर्ट की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन में इतने गुने का इजाफा होगा। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नया पैंतरा बता रहे हैं।
2,70,000 रुपए हो जाएगा वेतन
इस टेबल में जो संभावित वेतनमान दर्शाया जा रहा है, उसके मुताबिक सरकार में सबसे निचले वर्ग के कर्मचारियों (चपरासी/खलासी/माली/चौकीदार आदि) का नौकरी में प्रवेश करते वक्त वेतन अभी के 7000 रुपये से बढ़ कर 21000 रुपये हो जाएगा। इसी तरह किरानी का इंट्री वेतन अभी के 11360 रुपये से बढ़ कर 34080 रुपये हो जाएगा।
मंत्रालय में निदेशक स्तर के अधिकारियों का इंट्री वेतन तो वर्तमान के 46100 रुपये से बढ़ कर सीधे 138300 रुपये पर पहुंच जाएगा। मंत्रालय में सचिव की तो बात ही मत पूछिए। अभी उनका फिक्स वेतन 80000 रुपये होता है जो बढ़ कर 2,40,000 रुपये पर पहुंच जाएगा। इसी तरह केबिनेट सचिव का वेतन वर्तमान 90,000 रुपये से बढ़ कर 2,70,000 रुपये पर पहुंच जाएगा।
भ्रामक है प्रचार
हालांकि वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी से जब इस पर बात की गई तो उन्होंने इसे भ्रामक करार दिया। उनके मुताबिक 28 फरवरी 2014 को तो सातवें वेतन आयोग का गठन ही हुआ है और इसे 18 महीने का वक्त दिया गया है।
अभी तो आयोग अपना काम कर ही रहा है। इस तरह की अभी कोई अंतरिम रिपोर्ट नहीं आई है। आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने अमर उजाला को यह टेबल फारवर्ड करते हुए बताया कि उनके क्षेत्र में भाजपा के नेता सरकारी कर्मचारियों को इसे दिखा कर इसी साल रिपोर्ट लागू होने का झांसा दे रहे हैं।