स्वदेशी वेब ब्राउज़र और 'चिप्स टू स्टार्टअप' (C2S) कार्यक्रम के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत अब तक एक सेवा-प्रधान राष्ट्र रहा है, लेकिन अब इसे एक उत्पाद निर्माण करने वाला देश भी बनना चाहिए।
वैष्णव ने कहा, "पहले यह सोच थी कि सिर्फ सरकारी संस्थान ही सभी चीजों का विकास करेंगे, लेकिन अब समय बदल गया है। अब शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, छात्रों और शोधकर्ताओं को मिलकर नए समाधान बनाने होंगे।"
उन्होंने यह भी कहा कि सेवा क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है और इसे आगे बढ़ाना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ भारत को विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में भी मजबूत बनना होगा।
"अगर हम उन सभी चिप्स को देखें, जिन्हें विकसित करने की जरूरत है, तो कुछ कम मूल्य के लेकिन बड़ी मात्रा में बनने वाले होंगे, कुछ मध्यम मूल्य और मध्यम मात्रा के होंगे, और कुछ उच्च मूल्य के लेकिन कम मात्रा में बनने वाले होंगे। हमें इस पूरे क्षेत्र में काम करना होगा और इसी सोच के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं," वैष्णव ने कहा।
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मंत्री ने स्वदेशी ब्राउज़र के विकास में योगदान देने वाली टीमों को सम्मानित किया। पहला पुरस्कार टीम Zoho को 1 करोड़ रुपये, दूसरा पुरस्कार टीम Ping को 75 लाख रुपये और तीसरा पुरस्कार टीम Ajna को 50 लाख रुपये का दिया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि स्वदेशी ब्राउज़र डेटा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं और ऐसे ब्राउज़र होने चाहिए जिन पर पूरी तरह भरोसा किया जा सके।