आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल के मुताबिक, भारत में प्लेसमेंट पॉलिसी थोड़ी अलग है। यहां सभी छात्रों को मौका देने के मकसद से प्लेसमेंट के दौरान एक छात्र एक ही कंपनी का ऑफर लेटर ले सकता है। छात्र अपनी मर्जी से किसी भी कंपनी के प्लेसमेंट में नहीं जा सकता है।
इसलिए कंपनियों को आगह किया गया है कि वे भारतीय छात्रों के टेलेंट के चलते ही उन्हें ऑफर देते हैं तो अब संकट की घड़ी में उन्हें प्लेसमेंट देना न भूलें। भारतीय छात्र अपने हुनर, तकनीक, सोच और मेहनत से कंपनियों को दोबारा ऊंचाइयों पर पहुंचाने में पीछे नहीं रहेंगे।
प्लेसमेंट सेशन बीच में अटका:
भारत में प्लेसमेंट सेशन अगस्त सिंतबर से शुरू होकर दिसंबर तक चलता है। इसके बाद जनवरी से शुरू होकर मार्च तक जारी रहता है। हालांकि फरवरी से मार्च मध्य तक कई संस्थान परीक्षा और प्रैक्टिकल तैयारी के लिए रोक देते है।
अभी उच्च शिक्षण संस्थानों में चालू अकेडमिक सत्र के तहत मार्च में प्लेसमेंट सेशन पूरा होने से पहले वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन हो गया। ऐसे में बहुत सारे छात्रों को ऑफर लेटर तक नहीं मिल पाया था। हालांकि कंपनियों ने उनके नाम का चयन कर लिया था। इसके अलावा मार्च में ही कंपनियों गर्मियों की छुट्टियों में इंटर्नशिप देती थी, वह भी रूक गया है।