झारखंड में हुए नक्सली हमले के बाद यह बात सामने आई है कि पाकुड़ की पुलिस टीम को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि शहीद एसपी अमरजीत बलिहार के काफिले में शामिल लोगों के पास कितने हथियार थे।
अगर एसपी के काफिले से आठ हथियार लूटे गये तो पाकुड़ के पुलिस क्वार्टर से बरामद एक-47 व पिस्तौल कहां से आई?
पाकुड़ पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में
इस पूरे मामले में पाकुड़ पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। ऐसी खबरें थीं कि नक्सलियों ने एसपी अमरजीत बलिहार के काफिले पर हमले के दिन कुल आठ हथियार लूटे थे। लूटे गए हथियारों में चार इंसास, दो एके-47, दो पिस्तौल तथा 670 कारतूस शामिल हैं।
पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के साथ चल रहे हवलदार बबलू मुमरू, राजीव कुमार शर्मा(पुलिस 118), संतोष कुमार मंडल (पुलिस 90) तथा मनोज कुमार हेंब्रम ( पुलिस 143) के पास इंसास और सो-सौ गोलियां थी, जबकि लेबिनियस मरांडी (पुलिस-51) तथा चंदन कुमार थापा (पुलिस-40) के पास एके 47 व सौ-सौ गोलियां तथा दोनों के पास पिस्तौल व 35 गोलियां थीं।
क्वार्टर से बरामद हथियार किसका?
यह सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब पाकुड़ पुलिस ने रविवार को एक पुलिस जवान के पुलिस क्वार्टर से एक एके-47 व एक पिस्टल बरामद की। संताल प्रक्षेत्र के आइजी ने इस बात की पुष्टि की है कि बरामद एके-47 एसपी के नाम से और बरामद पिस्टल लेबिनियस मरांडी के नाम से एलॉट है।
इससे प्रमाणित है कि एसपी के नाम से एलॉट एके-47 को पाकुड़ में ही छोड़ दिया गया था। जबकि जानकारों का कहना है कि एसपी जब बाहर दौरे पर चलते हैं तो अपने नाम से एलॉट हथियार भी साथ ले लेते हैं। बावजूद एसपी का हथियार जवान के क्वार्टर में किस परिस्थिति में छोड़ा गया। ये जांच का विषय है।
पाकुड़ एसपी से जानकारी मिली है कि लेबेनियस मरांडी के क्वार्टर से एके-47 व एक पिस्टल मिली है। एके-47 एसपी के नाम से एलॉट थी, जबकि पिस्टल लेबेनियस के नाम से. -डॉ अरुण उरांव, आइजी दुमका