गोपालगंज में कपड़े उतारने गई महिला को सांप ने डंसामीडिया की सुर्खियों में रहने वाले जेएलकेएम विधायक जयराम महतो की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में हुए विवाद के मामले में पुलिस ने विधायक जयराम महतो समेत 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसके अलावा 40 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने थाना परिसर में भीड़ जुटाने, हंगामा करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में यह कार्रवाई की है।
सोशल मीडिया लाइव के बाद थाना परिसर में जुटी भीड़
पुलिस के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया लाइव के जरिए हिरासत में लिए गए गणेश दास की पिटाई की अफवाह फैलाई गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग बरवाअड्डा थाना परिसर में जुट गए। इस दौरान हंगामा हुआ और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचने की बात सामने आई। इसी मामले में पुलिस ने जयराम महतो समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है, जबकि 40 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
CCTV फुटेज से जुटाए जा रहे साक्ष्य
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। थाना परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि घटना के दौरान मौजूद लोगों की पहचान की जा सके और पूरे विवाद में उनकी भूमिका का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर प्राथमिकी में अन्य लोगों के नाम भी जोड़े जा सकते हैं।
जयराम महतो के खिलाफ पहले भी दर्ज हो चुकी है FIR
बरवाअड्डा थाना विवाद में जयराम महतो के खिलाफ यह पहली प्राथमिकी नहीं है। इससे पहले मुखिया यशोदा देवी के पुत्र की शिकायत पर भी जयराम महतो समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। वहीं, विधायक जयराम महतो की शिकायत पर भी एक अलग प्राथमिकी दर्ज हुई है। इस तरह बरवाअड्डा थाना विवाद में लगातार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर तूल पकड़ता जा रहा है।
विरोधियों ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए सवाल
घटना को लेकर जयराम महतो के विरोधियों ने इसकी निंदा की है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। विरोधियों ने थाना प्रभारी को खुलेआम फोन पर धमकाने या गाली-गलौज करने जैसे आरोपों से बचने की भी बात कही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरवाअड्डा थाना विवाद में किसकी क्या भूमिका रही और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।