आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर विधानसभा के कुटे मैदान में पिछले आठ दिनों से चल रहा RHA रिफॉर्म आंदोलन रविवार को समाप्त हो गया। हालांकि, आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि धरना समाप्त हुआ है, आंदोलन नहीं। अब RHA रिफॉर्म आंदोलन को राजधानी रांची के अलग-अलग गली-मोहल्लों तक ले जाकर लोगों के साथ संवाद किया जाएगा। इसके बाद राज्य के विभिन्न जिलों में भी आंदोलन और जनजागरूकता अभियान चलाने की योजना है।
आंदोलन के अगुआ सुमित दूबे ने कहा कि यह आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसकी शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था भारत में शुरुआत में सीमित अवधि के लिए लागू की गई थी, लेकिन समय के साथ राजनीतिक कारणों और वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे लगातार बढ़ाया जाता रहा। इससे प्रतिभाओं के साथ अन्याय होने की स्थिति पैदा हो रही है।
सुमित दूबे ने कहा कि आंदोलनकारी आरक्षण समाप्त करने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसमें व्यापक सुधार चाहते हैं। उनका कहना है कि आरक्षण व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके तथा प्रतिभाओं का दमन न हो।
उन्होंने कहा कि समाज और देश के गरीब विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक आधार को भी आरक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में उचित सहयोग मिलने से देश की प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को इस विषय पर खुलकर संवाद करने की जरूरत है। सवर्ण समाज के कई नेता और प्रभावशाली लोग होने के बावजूद वे इस मुद्दे पर बोलने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं और आम लोगों के बीच जागरूकता फैलाना जरूरी है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में जनसंवाद के माध्यम से लोगों को RHA रिफॉर्म के मुद्दे से जोड़ा जाएगा। इसके बाद जिलास्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मौके पर प्रखर सूर्यवंशी, ऋत्विक शाहदेव, सुमित समर सहित कई युवा मौजूद थे।