झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। रांची विश्वविद्यालय की धीमी और लचर शैक्षणिक कार्यप्रणाली के कारण करीब 30 हजार छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं होने और परिणाम जारी करने में लगातार हो रही देरी के कारण हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र एक वर्ष पीछे चला गया है। इसका सीधा असर उनकी उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है।
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इस मामले पर रांची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र पहले से ही काफी पीछे चल रहा था। इसकी समीक्षा की गई है और व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में सत्र को नियमित करने, समय पर परीक्षाएं आयोजित कराने और परिणाम जल्द प्रकाशित करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएंगे।
छात्रों ने मांगा ठोस समाधान
हालांकि छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जमीनी स्तर पर ठोस सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। छात्रों का कहना है कि उनका एक वर्ष बर्बाद हो चुका है और अब उन्हें समय पर परीक्षाएं, परिणाम तथा डिग्री उपलब्ध कराकर ही खोए हुए अवसरों की भरपाई की जा सकती है।