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Jharkhand: रांची विश्वविद्यालय की लापरवाही से 30 हजार छात्रों का भविष्य अधर में, एक साल पीछे हुआ शैक्षणिक सत्र

Sat, 30 May 2026 06:43 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

रांची विश्वविद्यालय की धीमी शैक्षणिक कार्यप्रणाली के कारण करीब 30 हजार छात्रों का शैक्षणिक सत्र एक वर्ष पीछे चला गया है। समय पर सेमेस्टर परीक्षाएं और परिणाम जारी नहीं होने से छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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रांची विश्वविद्याल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। रांची विश्वविद्यालय की धीमी और लचर शैक्षणिक कार्यप्रणाली के कारण करीब 30 हजार छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं होने और परिणाम जारी करने में लगातार हो रही देरी के कारण हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र एक वर्ष पीछे चला गया है। इसका सीधा असर उनकी उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है।

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नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई कर रहे छात्रों को लगा झटका

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत 2022-26 सत्र में नामांकन लेने वाले छात्रों को उम्मीद थी कि वे वर्ष 2025 तक अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर लेंगे। इसके बाद वे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) में नामांकन लेकर आगे की पढ़ाई करेंगे और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होंगे। लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से समय पर सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित नहीं किए जाने और परिणाम प्रकाशित करने में लगातार हो रही देरी ने छात्रों की योजनाओं पर पानी फेर दिया है।

सीयूईटी-पीजी और नौकरी के अवसरों से भी वंचित हुए छात्र

छात्रों का कहना है कि सत्र विलंबित होने के कारण वे सीयूईटी-पीजी जैसी महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में आवेदन नहीं कर सके। इसके अलावा कई सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियाओं में भी वे हिस्सा नहीं ले पाए। जिन विद्यार्थियों को अब तक पीजी की पढ़ाई शुरू कर देनी चाहिए थी, वे आज भी स्नातक के अंतिम परिणाम और डिग्री का इंतजार कर रहे हैं। इससे उनके करियर की गति प्रभावित हुई है।
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छात्रों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

रांची विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र समीर उरांव, दीपक कुमार, अर्चना कुमारी सहित कई विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा और परिणाम में लगातार हो रही देरी उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा हजारों छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

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इस मामले पर रांची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र पहले से ही काफी पीछे चल रहा था। इसकी समीक्षा की गई है और व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में सत्र को नियमित करने, समय पर परीक्षाएं आयोजित कराने और परिणाम जल्द प्रकाशित करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएंगे।

छात्रों ने मांगा ठोस समाधान

हालांकि छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जमीनी स्तर पर ठोस सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। छात्रों का कहना है कि उनका एक वर्ष बर्बाद हो चुका है और अब उन्हें समय पर परीक्षाएं, परिणाम तथा डिग्री उपलब्ध कराकर ही खोए हुए अवसरों की भरपाई की जा सकती है।

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