खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड के कोड़ाकेल गांव में बिरसा हरित क्रांति योजना के तहत बंजर जमीन को फलदार बागानों में बदला गया है। किसानों को सिंचाई सुविधा, पौधे और तकनीकी सहायता मिलने से खेती और बागवानी को बढ़ावा मिला है।
झारखंड में किसानों की आय बढ़ाने और बंजर भूमि के बेहतर उपयोग को लेकर शुरू की गई बिरसा हरित क्रांति योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव की नई मिसाल पेश कर रही है। इस योजना के तहत किसानों को फलदार पौधे, सिंचाई सुविधा और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे खेती और बागवानी को नई दिशा मिल रही है। खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड स्थित कोड़ाकेल गांव इस योजना की सफलता का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है।
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बंजर जमीन पर शुरू हुई बागवानी, बदल गई गांव की तस्वीर
कोड़ाकेल गांव में पहले बड़ी मात्रा में भूमि बंजर पड़ी रहती थी। सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान खेती नहीं कर पाते थे और रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर थे। लेकिन बिरसा हरित क्रांति योजना के लागू होने के बाद स्थिति बदल गई। यहां किसानों को मनरेगा के तहत कुआं और सोलर आधारित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे बागवानी को बढ़ावा मिला। ग्रामसभा के माध्यम से किसानों का चयन कर उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है।
किसानों ने उगाए आम, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट
गांव की किसान मालती देवी बताती हैं कि उनकी दो एकड़ बंजर जमीन अब उपजाऊ बागान में बदल चुकी है। यहां आम, लीची, अमरूद, नींबू, अनार और ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए पौधों और तकनीकी मार्गदर्शन से बगीचे की अच्छी देखभाल हो रही है। अब उनके बगीचे में आम, लीची और अमरूद की अच्छी पैदावार हो रही है और व्यापारी सीधे गांव आकर फलों की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है।
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किसानों की आय में बढ़ोतरी, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
मुरहू प्रखंड के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने बताया कि सरकार की कृषि और बागवानी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा हरित क्रांति योजना से सैकड़ों किसान आत्मनिर्भर बने हैं। इस वर्ष प्रखंड में लगभग 386 एकड़ भूमि पर फल और सब्जियों की खेती की जा रही है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला मजबूत आधार
यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही है। साथ ही यह किसानों के जीवन में स्थायी खुशहाली लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।