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सुवर्णरेखा में नाव हादसा: दो युवक लापता, पिता का आरोप- तलाश करने नहीं पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम

Fri, 09 Oct 2026 04:00 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

सुवर्णरेखा नदी में नाव पलटने से लापता हुए दो युवकों का 24 सितंबर से अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। बेटे की तलाश में वृद्ध पिता खुद नाव लेकर नदी में उतर रहे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इतने दिन बीतने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से खोजबीन के लिए कोई टीम नहीं पहुंची। पढ़ें पूरी खबर
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नदी। फाइल फोटो
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विस्तार
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सुवर्णरेखा नदी में 24 सितंबर की रात मछली पकड़ने के दौरान नाव पलटने से लापता हुए दो युवकों का इतने दिन बीतने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बारीडीह मीरा पथ निवासी अमित कुमार उर्फ गजनी और जिला स्कूल रोड निवासी अमित कुमार उर्फ बिट्टू की तलाश में अब बिट्टू के लाचार पिता अवधेश साहू खुद नाव लेकर पानी में उतर गए हैं। वृद्धावस्था के बावजूद वह रोजाना उम्मीद के साथ नदी की लहरों के बीच बेटे की खोज करते हैं, मगर उनके हाथ केवल निराशा ही लगती है।
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दुर्घटना की रात और राहत का इंतजार
24 सितंबर की रात गजनी, बिट्टू और उनका साथी विक्की नाव पर सवार होकर सुवर्णरेखा नदी में मछली पकड़ने गए थे। नदी के बीच अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण नाव पलट गई। दुर्घटना के समय विक्की किसी तरह तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रहा, लेकिन गजनी और बिट्टू नदी की तेज धार में बह गए।

इस हादसे के बाद से ही दोनों परिवारों में मातम और अनिश्चितता का माहौल है। परिजनों ने बहरागोड़ा तक नदी के तमाम घाटों और तटीय इलाकों में अपने स्तर पर खोजबीन की है। परिजनों का दुख है कि घटना के इतने दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस या प्रशासनिक टीम नाव लेकर तलाश करने नहीं आई। इसके अलावा स्थानीय विधायक या सांसद के प्रतिनिधियों ने भी परिजनों से मुलाकात कर उनकी स्थिति जानने का प्रयास नहीं किया।
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जीवन रक्षक खुद बने नदी का शिकार
लापता गजनी और बिट्टू उत्कृष्ट तैराक माने जाते हैं। इन दोनों युवकों ने वर्ष 2022 में नदी में डूबते हुए लोगों की जान बचाई थी। इस साहसिक कार्य के लिए जनप्रतिनिधियों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया था। जो हाथ कभी दूसरों को नदी के प्रकोप से बचाते थे, आज उन्हीं युवकों के परिजन उनकी सलामती की खबर पाने के लिए व्याकुल हैं। क्षेत्र के लोग भी इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि नदी के उतार-चढ़ाव को अच्छी तरह समझने वाले दोनों युवक किस प्रकार बह गए।

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परिवार का एकमात्र सहारा
गजनी अपने परिवार का एकमात्र सहारा था और दिन-रात मेहनत करके भरण-पोषण करता था। उसके परिवार में बुजुर्ग मां, बीमार पत्नी और एक छोटा बेटा शामिल हैं। उसके लापता होने के उपरांत घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। इस कठिन समय में पड़ोसी और हमदर्द ही परिवार की सहायता कर रहे हैं। घर के दरवाजे पर होने वाली हर आहट पर परिजन इस आस में देख उठते हैं कि शायद अमित वापस आ गया हो। दोनों परिवार आज भी किसी सकारात्मक खबर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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