केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी एक्ट 2026 के खिलाफ झारखंड में भी विरोध की आवाज तेज होने लगी है। शुक्रवार को राजधानी रांची के पिस्का मोड़ चौक पर छात्रों ने इस कानून के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। करीब दो दर्जन छात्रों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर यूजीसी एक्ट 2026 को वापस लेने और इसमें संशोधन की मांग की।
समाज में विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे छात्र दुर्गा मंदिर परिसर से पिस्का मोड़ चौक तक पैदल मार्च करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। छात्रों का कहना था कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था में समानता के सिद्धांत के विपरीत है और समाज में विभाजन को बढ़ावा देता है।
‘शिक्षा में जातिवाद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही सरकार’
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी जातिवाद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर जातिवाद समाप्त करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे कानून ला रही है, जो समाज में भेदभाव को और गहरा करते हैं। छात्रों का कहना था कि इस अधिनियम में समान अवसर की भावना दिखाई नहीं देती।
‘यूजीसी एक्ट का प्रारंभिक ड्राफ्ट अधिक संतुलित था’
एक अन्य छात्र नेता ने कहा कि यूजीसी एक्ट का प्रारंभिक ड्राफ्ट कुछ हद तक संतुलित था, लेकिन अंतिम ड्राफ्ट पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून समाज को आपस में बांटने की साजिश है। छात्रों ने कहा कि वे जाति देखकर दोस्ती या व्यवहार नहीं करते, लेकिन इस तरह के कानून लागू होने से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होगा। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि यह कानून विशेष वर्गों को निशाना बनाता है, जिससे मेधावी छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
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योग्यता आधारित हो शिक्षा व्यवस्था
छात्रों ने कहा कि विकसित देशों में शिक्षा व्यवस्था योग्यता आधारित होती है, न कि जाति आधारित। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी एक्ट 2026 को वापस नहीं लिया, तो रांची से शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले दिनों में पूरे झारखंड में फैलाया जाएगा।