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एसआईआर: झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण की मियाद खत्म, 63 लाख लोगों को नोटिस; 60 दिन बढ़ाने का प्रस्ताव

Thu, 01 Oct 2026 04:39 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की दावा-आपत्ति की समयसीमा खत्म हो गई है। करीब 63 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने 60 दिन की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर आयोग का फैसला बाकी है।

 

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निर्वाचन आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की तय समयसीमा समाप्त हो गई है। राज्य में करीब 63 लाख लोगों को इस प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने दावा-आपत्ति की मियाद को 60 दिन बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। यदि समयसीमा नहीं बढ़ती है, तो बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर नोटिसों का निपटारा करेंगे और कागजी औपचारिकताएं पूरी करेंगे। निर्वाचन आयोग ने हाल में आंध्र प्रदेश और मेघालय में एसआईआर की अवधि बढ़ा दी है।

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आवेदनों की स्थिति और आंकड़े
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए राज्य भर से 6,42,347 लोगों ने फॉर्म-6 भरा है। इनमें विदेश में रहने वाले 106 भारतीय नागरिकों द्वारा भरा गया फॉर्म-6ए भी शामिल है। वहीं मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए 12,275 लोगों ने फॉर्म-7 के माध्यम से आवेदन किया है। इसके अलावा मतदाता विवरण में संशोधन करने या एक ही परिवार के सभी मतदाताओं को एक ही मतदान केंद्र से जोड़ने के लिए 4,36,782 लोगों ने फॉर्म-8 जमा किया है। समयसीमा बढ़ने की स्थिति में आम मतदाताओं को इन आवेदनों और कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करने का अतिरिक्त समय मिल जाएगा।

अंतिम दिन अंचल कार्यालयों में उमड़ी भीड़
दावा-आपत्ति दर्ज कराने के अंतिम दिन रांची के बड़गाईं, कांके, सदर, अरगोड़ा और रातू समेत विभिन्न अंचल कार्यालयों में लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं। बुजुर्गों को वर्ष 2003 के पुराने दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण मतदाता सूची से नाम कटने का भय सता रहा है। किराए पर रहने वाले लोगों को मकान मालिकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ओरमांझी क्षेत्र के इरबा, हरचंडा और चुटूपालू जैसी ग्रामीण तथा आदिवासी बस्तियों में जागरूकता की कमी और जरूरी कागजात न होने के कारण नए मतदाता परेशान दिखे।
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सत्यापन कार्य में बीएलओ के सामने चुनौतियां
आजीविका और काम की तलाश में बड़े पैमाने पर होने वाला पलायन अभियान में मुख्य बाधा बनकर उभरा है। लोगों के अपने मूल निवास स्थानों पर मौजूद न रहने के कारण बीएलओ के लिए घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अनेक स्थानों पर बीएलओ के पहुंचने पर संबंधित व्यक्ति घर पर उपलब्ध नहीं मिलते हैं। यदि निर्वाचन आयोग 60 दिनों के समयविस्तार प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है, तो मतदाताओं और निर्वाचन कर्मियों दोनों को राहत मिलेगी। आयोग के अगले निर्देश तक बीएलओ घर-घर जाकर लंबित नोटिसों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया जारी रखेंगे।

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