प्रेस को जानकारी देते केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की
राजधानी रांची में केंद्रीय सरना समिति की ओर से मंगलवार को सिरमटोली में सरहुल पर्व को लेकर अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष सरहुल पर्व को पूरी तरह पारंपरिक रीति-रिवाज और आदिवासी संस्कृति के अनुरूप मनाया जाएगा।
पारंपरिक विधि से की जाएगी पूजा-अर्चना
समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि सरहुल आदिवासी समाज का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व है, जो प्रकृति पूजा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सरना स्थल और जाहेर स्थल पर पहान पुजारियों द्वारा पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की जाएगी।
समाज के लोगों से झंडा लगाने की अपील
उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि सरहुल पूजा से पहले नए फल, फूल और सब्जियों का उपयोग न करें तथा घर, आंगन, अखाड़ा और सरना स्थलों की साफ-सफाई सुनिश्चित करें। साथ ही प्रत्येक घर में सरना झंडा लगाने की भी अपील की गई।
बैठक में DJ पर लगा बैन
बैठक में लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि अधिक से अधिक लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हों और झांकियों के माध्यम से आदिवासी इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरहुल में डीजे का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि मांदर और ढोल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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ढोल-नगाड़ों की गूंज
वहीं रुपचंद तिर्की ने कहा कि शोभायात्रा समय पर निकले और इसमें ढोल-नगाड़ों की गूंज हो, न कि फिल्मी गीतों की। उन्होंने सरकार से सड़कों की मरम्मत, साफ-सफाई और बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की भी मांग की।