कैमूर के नौघरा स्थित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भोजन की गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाए। नाराज विद्यार्थी थाली लेकर मंत्री जमा खान के आवास पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हुई। अल्पसंख्यक पदाधिकारी ने जांच कराने की बात कही।
कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड के नौघरा स्थित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आया है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रबंधन पर पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं देने का आरोप लगाया है। इससे नाराज विद्यार्थी अपनी थालियां लेकर बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एवं स्थानीय विधायक मोहम्मद जमा खान के आवास पर पहुंच गए। हालांकि, वहां उनकी मंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी।
छात्र-छात्राओं का आरोप है कि विद्यालय शुरू होने के समय से ही उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि दाल और सब्जी काफी पतली होती है और भोजन की मात्रा भी इतनी कम रहती है कि पेट नहीं भर पाता। कुछ विद्यार्थियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें जानवरों जैसा खाना परोसा जा रहा है।
इस पर विद्यार्थियों ने नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि जब उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है, तो वे अगले दिन तक इंतजार कैसे करेंगे? उनका कहना है कि आवासीय विद्यालय में रहने वाले विद्यार्थियों को समय पर पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए, ताकि वे स्वस्थ रहकर पढ़ाई कर सकें।
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छात्र-छात्राओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब विद्यालय के संचालन के लिए सरकारी राशि उपलब्ध कराई जाती है, तो भोजन की गुणवत्ता और मात्रा में कमी क्यों है? हालांकि, भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू और खर्च से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इतनी बड़ी लागत से तैयार विद्यालय में भोजन की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है। विद्यार्थियों का आरोप है कि विद्यालय शुरू होने के बाद से ही उन्हें मानक के अनुरूप भोजन नहीं मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता और मात्रा की निगरानी कौन कर रहा है तथा विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है। इन सवालों पर स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप
विद्यार्थियों ने भोजन के साथ-साथ पढ़ाई की व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि विद्यालय में कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि वे बेहतर शिक्षा की उम्मीद में आवासीय विद्यालय में दाखिला लेकर रह रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विद्यालय में सभी आवश्यक विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति और नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
छात्राओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठाए सवाल
कुछ छात्राओं ने स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को लेकर भी शिकायत की। उनका आरोप है कि किसी छात्रा के बेहोश होने की स्थिति में दीपा मैम मदद के लिए नहीं आती हैं। छात्राओं ने यह भी कहा कि प्रिंसिपल से शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं पर समुचित ध्यान नहीं दिया जाता है।
अल्पसंख्यक पदाधिकारी ने कहा- जांच कराएंगे
इस संबंध में अल्पसंख्यक पदाधिकारी सतेंद्र त्रिपाठी से मोबाइल फोन पर संपर्क कर विद्यार्थियों की शिकायतों के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है। हालांकि, उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही। अब देखना होगा कि विभाग की जांच में विद्यार्थियों की शिकायतों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और विद्यालय में भोजन, शिक्षण तथा स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।