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रांची: सरकारी अस्पतालों में बदलेगा जांच का तरीका, अब डिजिटल पेपर पर मिलेगी एक्सरे से एमआरआई तक की रिपोर्ट

Fri, 30 Oct 2026 06:31 AM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

रांची जिले के सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डाइकॉम इमेजिंग तकनीक शुरू करने की तैयारी है। इससे मरीजों को एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई की रिपोर्ट विशेष डिजिटल पेपर पर मिलेगी। 
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सदर अस्पताल रांची - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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स्वास्थ्य विभाग ने रांची जिले के सदर अस्पताल सहित सभी अनुमंडलीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अत्याधुनिक डाइकॉम इमेजिंग तकनीक शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को अब एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई की पुरानी काली प्लास्टिक फिल्मों से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। अब मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाले विशेष डिजिटल पेपर पर तुरंत जांच रिपोर्ट मिलेगी। इससे सामान्य और गरीब वर्ग के मरीजों को महंगे निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही धुंधली रिपोर्ट लेकर भटकना पड़ेगा।
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डिजिटल इमेजिंग की इस नई व्यवस्था से जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और गंभीर मरीजों का इलाज बिना किसी देरी के तुरंत शुरू हो सकेगा। सदर अस्पताल से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों तक एक समान गुणवत्ता की जांच सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे आम जनता को सीधा फायदा पहुंचेगा।

रिपोर्ट की गुणवत्ता और सटीकता में सुधार
पारंपरिक एक्सरे फिल्मों में अक्सर पर्याप्त रोशनी की कमी या प्रिंटिंग की खराबी के कारण रिपोर्ट धुंधली रह जाती थी। धुंधली तस्वीरों के कारण डॉक्टरों को मरीज की सटीक बीमारी पकड़ने में काफी कठिनाई होती थी। नई डाइकॉम तकनीक के प्रयोग से यह समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। इस प्रणाली में एक्सरे और सोनोग्राफी की रिपोर्ट 210 जीएसएम के प्रीमियम पेपर पर प्रिंट की जाएगी। वहीं सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जटिल जांचों की रिपोर्ट 240 जीएसएम के बड़े ए-3 आकार के पेपर पर बिल्कुल साफ और गहरे रंगों में छपेगी। इस उच्च तकनीक से डॉक्टरों को हड्डियों के बारीक फ्रैक्चर, फेफड़ों के संक्रमण और नसों की जटिल समस्याओं की पहचान करने में अत्यधिक आसानी होगी।
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रिपोर्ट की लंबी उम्र और तुरंत उपलब्धता
पारंपरिक प्लास्टिक वाली एक्सरे फिल्में अत्यधिक गर्मी, नमी या मुड़ने पर बहुत जल्दी खराब हो जाती थीं और कुछ ही महीनों में काली पड़ जाती थीं। इसके विपरीत, विशेष पेपर पर मिलने वाली यह डिजिटल इमेजिंग रिपोर्ट पूरी तरह टिकाऊ रहेगी। मरीज इसे सामान्य कागजी फाइलों की भांति सालों-साल सुरक्षित रख सकेंगे। इससे भविष्य में इलाज के दौरान दोबारा जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पुराना स्वास्थ्य रिकॉर्ड डॉक्टर को आसानी से दिखाया जा सकेगा।

अस्पतालों में डिजिटल प्रिंटर और आधुनिक कंसोल सॉफ्टवेयर लगाए जा रहे हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होते ही मशीन से सीधे कंप्यूटर और प्रिंटर पर डेटा स्थानांतरित हो जाएगा। इससे मरीजों को जांच के बाद घंटों रिपोर्ट के सूखने या तैयार होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

गांवों में ही मिलेगी बड़े शहरों जैसी सुविधा
अब तक अत्याधुनिक मेडिकल इमेजिंग की यह तकनीक केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों या निजी अस्पतालों तक ही सीमित थी। अब रांची जिले के सभी प्रखंडों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक इस आधुनिक तकनीक का विस्तार किया जा रहा है। इसके लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को साधारण एक्सरे या जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा। इससे ग्रामीणों के समय की बचत होगी और उन्हें यात्रा तथा किराए-भाड़े पर होने वाले आर्थिक बोझ से भी बड़ी राहत मिलेगी।

रखरखाव के कड़े नियमों से निर्बाध सेवा
अस्पतालों में लगाई जा रही इन आधुनिक मशीनों के रखरखाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़े दिशानिर्देश तय किए हैं। जिला अस्पताल में मशीन खराब होने पर तकनीकी टीम को 24 घंटे के भीतर उसे ठीक करना होगा। वहीं ग्रामीण केंद्रों पर मशीन में कोई खराबी आने पर 48 घंटे के भीतर सुधार कार्य पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मशीनें हर समय चालू रहें और मरीजों को 'मशीन खराब है' की वजह से बिना इलाज वापस न लौटना पड़े।
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