रांची इस समय भीषण गर्मी के साथ गंभीर जल संकट से जूझ रही है। शहर में तापमान लगातार 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे जल स्रोत तेजी से सूखते जा रहे हैं। उमस भरी गर्मी और गिरते जल स्तर के कारण कई इलाकों में पेयजल की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।
टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता
नगर निगम द्वारा कई वार्डों में पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था लोगों की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रही है। “नल से जल” योजना भी कई क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। फरवरी में जहां करीब 10 वार्डों में पानी की कमी महसूस की जा रही थी, वहीं अब यह समस्या बढ़कर 18 वार्डों तक पहुंच चुकी है।
कई इलाकों में अधूरा पाइपलाइन कार्य
वार्ड संख्या 9, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 34, 35, 37, 38, 39, 49, 52, 53 और 55 जैसे क्षेत्रों में पाइपलाइन का काम अधूरा है या जलापूर्ति अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। जल संकट के चलते मार्च के अंत तक जहां लगभग 60 टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा था, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर करीब 120 कर दी गई है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
भूजल स्तर में तेज गिरावट से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक भूजल दोहन के कारण शहर में जल स्तर 10 से 25 मीटर तक नीचे चला गया है। इसका असर कांके रोड, हरमू, लालपुर, चुटिया, डोरंडा, अरगोड़ा और हिंदपीढ़ी जैसे प्रमुख इलाकों में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है, जहां लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में कठिनाई हो रही है।
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प्रशासन के प्रयास जारी, फिर भी चुनौती बरकरार
नगर निगम के मुताबिक शहर में प्रतिदिन करीब 311 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के कारण स्थिति नियंत्रण में नहीं आ पा रही है। प्रशासन ने टैंकरों की संख्या बढ़ाकर राहत देने की कोशिश की है, फिर भी जमीनी स्तर पर जल संकट लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।