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झारखंड: 2.23 करोड़ का बकाया, 15 दिन का अल्टीमेटम! भुगतान नहीं हुआ तो बंद हो सकता है जमशेदपुर का पीएंडएम मॉल

Sat, 03 Oct 2026 10:59 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

टाटा स्टील ने बिष्टुपुर स्थित पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को 2.23 करोड़ रुपये के बकाया लीज रेंट और रोड सेस का भुगतान करने के लिए 15 दिनों का अंतिम समय दिया है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि रकम जमा नहीं होने पर सबलीज रद्द कर जमीन वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है, जिससे पीएंडएम मॉल का संचालन प्रभावित हो सकता है।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिष्टुपुर स्थित पीएंडएम मॉल पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। टाटा स्टील ने पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को बकाया लीज रेंट और रोड सेस जमा करने के लिए 15 दिनों का अंतिम मौका दिया है। कंपनी ने साफ किया है कि तय अवधि में 2,23,86,000 रुपये का पूरा भुगतान नहीं किया गया तो सबलीज की स्वीकृति रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और संबंधित जमीन को वापस अपने कब्जे में लेने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

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टाटा स्टील के भूमि प्रबंधन विभाग के प्रमुख आनंद कुमार ने इस संबंध में पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नितेश कुमार को पत्र भेजा है। कंपनी के मुताबिक यह बकाया वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2014-15 के बीच का है। इसमें निर्धारित लीज रेंट के साथ लागू 25 प्रतिशत रोड सेस भी शामिल है। कंपनी का कहना है कि इस संबंध में कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं और संस्थान ने भी अपना पक्ष रखा है, लेकिन अब तक बकाया रकम जमा नहीं की गई।

2.23 करोड़ रुपये जमा करने के लिए 15 दिन की मोहलत

टाटा स्टील ने अपने पत्र में कहा है कि पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर पूरी बकाया राशि 2,23,86,000 रुपये जमा करनी होगी। कंपनी के अनुसार लंबे समय से लंबित भुगतान के निपटारे के लिए पहले भी कई निर्देश दिए गए थे। अगर निर्धारित समय में पूरी रकम नहीं चुकाई गई तो सबलीज रद्द करने की कार्रवाई शुरू होगी। इसके बाद संबंधित जमीन को दोबारा अपने अधिकार में लेने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। कंपनी ने यह भी कहा है कि इस पूरी कार्रवाई का जोखिम और खर्च पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा।

120 प्रतिशत तक के अन्य सेस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला

टाटा स्टील ने यह भी स्पष्ट किया है कि लीज रेंट से जुड़े 120 प्रतिशत तक के अन्य सेस का मामला फिलहाल उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए इस रकम को मौजूदा बकाया मांग में शामिल नहीं किया गया है। कंपनी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद ही इस मद में आगे कोई फैसला लिया जाएगा।

सरकार की मंजूरी और लीज समझौते में भुगतान की शर्त

कंपनी ने अपनी कार्रवाई के लिए झारखंड सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से 8 जून 2007 को जारी पत्र का हवाला दिया है। इस पत्र के जरिए पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को सबलीज की मंजूरी वार्षिक किराया और सेस के नियमित भुगतान की शर्त पर दी गई थी।
सरकारी स्वीकृति में यह भी प्रावधान था कि बकाया राशि की वसूली प्रशासन या संबंधित निकाय पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत कर सकते हैं।

टाटा स्टील ने 7 मार्च 2008 को कंपनी और पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच हुए लीज समझौते की शर्तों का भी उल्लेख किया है। इसके मुताबिक सबलीज धारक को तय दर के अनुसार किराया और सेस साल में दो बार जमा करना था। इसके लिए 6 जनवरी और 6 जुलाई की समय सीमा निर्धारित थी। भुगतान में देरी होने पर तय दर के अनुसार ब्याज भी देना होता था।

छह महीने से ज्यादा बकाया रहने पर सबलीज खत्म करने का प्रावधान

लीज समझौते की धारा 6.1.3 में प्रावधान है कि यदि किराया, सेस या अन्य देय राशि छह महीने से अधिक समय तक बकाया रहती है और मामला वास्तविक मध्यस्थता प्रक्रिया में नहीं है, तो टाटा स्टील सबलीज समाप्त कर सकती है। ऐसी स्थिति में कंपनी संबंधित जमीन को फिर से अपने अधिकार में ले सकती है। टाटा स्टील ने यह भी बताया है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने 22 जुलाई 2025 को इस मामले से संबंधित आदेश जारी किया था। कंपनी के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश और लीज समझौते में तय दायित्वों के आधार पर संस्थान की ओर से पहले भेजे गए पत्रों में दर्ज आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया गया है। अब पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के सामने 15 दिनों में पूरी बकाया राशि जमा करने की समय सीमा है। अगर भुगतान नहीं हुआ तो सबलीज रद्द करने और जमीन वापस लेने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में बिष्टुपुर स्थित पीएंडएम मॉल का संचालन प्रभावित होकर बंद भी हो सकता है।

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