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Jharkhand News: रामगढ़ पहुंचे बाबूलाल मरांडी, बोले- चार मजदूरों की मौत हादसा नहीं, व्यवस्था की विफलता

Sun, 14 Jun 2026 10:28 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला,रांची

सार

रामगढ़ में अवैध खनन के दौरान चार मजदूरों की मौत के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने घटना को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा व नौकरी देने की मांग की।
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परिजनों से बात करते नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी।
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विस्तार
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झारखंड के रामगढ़ में अवैध खनन मामले में चार मजदूरों की मौत के मामले का जायजा लेने रविवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी रामगढ़ पहुंचे। उन्होंने मृतक देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार के पीड़ित परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। परिजनों से विस्तृत जानकारी लेते हुए उन्होंने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चारों मजदूरों की असमय मृत्यु अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है। जिन चार मजदूरों की मौत हुई है, वे काफी गरीब परिवारों से आते हैं। इनमें देवा और डबलू आपस में चाचा-भतीजा हैं। आशीष घटवार की पत्नी गर्भवती है, जबकि डबलू बेदिया की पत्नी और एक बच्ची है। वहीं, देवा बेदिया और किशोर रवानी अविवाहित थे।

जिला प्रशासन और सीसीएल की सीधी पर उठे सवाल

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मरांडी ने कहा कि रामगढ़ में बंद पड़ी खदान में एक व्यक्ति के गिरने के बाद उसे बचाने गए चार लोगों की दम घुटने से मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्ट तंत्र और संवेदनहीन व्यवस्था द्वारा की गई सामूहिक हत्या जैसी प्रतीत होती है। जब बंद खदानों की घेराबंदी करना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और लोगों की आवाजाही रोकना जिला प्रशासन और सीसीएल की सीधी जिम्मेदारी है, तो सवाल उठता है कि आखिर रामगढ़ के डीसी, एसपी और सीसीएल प्रबंधन किस बात की तनख्वाह और सुविधाएं ले रहे हैं? क्या उनकी भूमिका सिर्फ हादसों के बाद औपचारिक बयान जारी करने तक सीमित रह गई है?

अवैध खनन कारोबार में सीएम हाउस की सीधी भूमिका- मरांडी
मरांडी ने राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जो सूचनाएं मिल रही हैं, उनके अनुसार राज्य में हो रहे अवैध खनन कारोबार में सीएम हाउस की सीधी भूमिका है। कोई भी अवैध कारोबार हो, उससे होने वाली कमाई का 75 प्रतिशत हिस्सा मुख्यमंत्री तक पहुंचता है। शेष 25 प्रतिशत में दलाल, बिचौलिए, पुलिस-प्रशासन और अन्य लोगों की हिस्सेदारी होती है। लूट के इस खेल में सरकार और प्रशासन तो शामिल हैं ही, वन विभाग की भी मिलीभगत है।

'रेस्क्यू के नाम पर पांच हजार रुपये वसूले गए'

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मरांडी ने कहा कि हादसे के बाद जो बातें सामने आ रही हैं, वे इंसानियत को भी शर्मसार कर देने वाली हैं। आरोप है कि रेस्क्यू के नाम पर पांच हजार रुपये वसूले गए और गंभीर हालत में लोगों को बेहतर अस्पताल भेजने के बजाय सीधे सदर अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी गई। यदि यह सच है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों की मौत पर भी वसूली करने वाली निर्लज्ज व्यवस्था का वीभत्स चेहरा है।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ अब कोयला चोरी, अवैध कारोबार और पुलिस संरक्षण के मामलों में धनबाद से पीछे नहीं रहा है। जब सत्ता के गलियारों में "बोली" लगाकर पोस्टिंग तय होती हो, तो जनता की सुरक्षा नहीं, बल्कि "हफ्ता वसूली" ही प्राथमिकता बन जाती है। ऊपर से नीचे तक सेटिंग और हिस्सेदारी का खेल चलता रहे, इसलिए खदानें मौत का कुआं बनी रहें, शायद यही मॉडल बना दिया गया है।

नेता प्रतिपक्ष ने की ये मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की कि यदि सरकार में संवेदनशीलता और जवाबदेही का थोड़ा भी अंश शेष है, तो इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। दोषियों पर सिर्फ निलंबन का दिखावटी मलहम नहीं, बल्कि हत्या जैसी धाराओं में कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा, सरकारी नौकरी और न्याय सुनिश्चित किया जाए। वरना जनता यह मानने को मजबूर होगी कि झारखंड में गरीब की जान की कीमत अब सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुआवजे की फाइल तक सीमित रह गई है।

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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड में सरकार, प्रशासन और अवैध खनन माफियाओं का मजबूत सिंडिकेट बना हुआ है। वर्तमान राज्य सरकार में लूट-खसोट चरम पर है। अवैध कारोबार के कारण लगातार जनहानि हो रही है। विडंबना यह है कि सरकार के संरक्षण में यह सब कुछ हो रहा है।

'अवैध सुरंगनुमा कूप बनाकर कोयले की लूट की जा रही'
मरांडी ने कहा कि इस इलाके में 100 से अधिक अवैध सुरंगनुमा कूप बनाकर कोयले की लूट की जा रही है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को पीड़ित परिवारों और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन के कारण उनकी जमीन चली गई है और उन्हें नौकरी भी नहीं मिली है। रहने के लिए घर तक नहीं है। मजबूरी में उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर कोयले का काम करना पड़ता है। पीड़ित परिवारों ने सीसीएल से 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

परिजनों से बात करते नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी

 

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