जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े मामले में शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से काउंटर एफिडेविट दाखिल किया गया। इससे पहले अदालत ने राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया था। मामले की अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर को होगी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने कहा कि पूरे मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और अदालत को पुलिस की जांच पर विश्वास है। हालांकि, उन्होंने जांच की निगरानी के लिए किसी स्वतंत्र संस्था की आवश्यकता को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय भी रखी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र संस्था के माध्यम से जांच की मॉनिटरिंग की जा सकती है।
अभ्यर्थियों का पक्ष रखा गया
मामले में इंटरवेनर सह अधिवक्ता कुमार हर्ष ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान उन्होंने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की थी। इसमें अनसिलेक्टेड मेरिटोरियस अभ्यर्थियों का पक्ष रखा गया है। उनका कहना है कि इन अभ्यर्थियों को भी मामले की सुनवाई में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया गया है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है
सफल अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता प्रिया झुंझुनवाला ने कहा कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को अपना एफिडेविट दाखिल कर दिया है। सरकार के जवाब पर अभ्यर्थियों की ओर से प्रतिक्रिया दी जानी जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है।
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वहीं, आंदोलनरत अभ्यर्थियों में शामिल राजेश प्रसाद ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए परीक्षा प्रकरण में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हित में उचित कार्रवाई की मांग की। अब अगली सुनवाई में सरकार के काउंटर एफिडेविट और परीक्षा रद्द करने के आधार पर आगे की दलीलें सुनी जाएंगी।