झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और बाल विकास परियोजना अधिकारी नियुक्ति परीक्षा रद्द किए जाने के मामले में हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। आयोग ने राज्य सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए इसे सरकार का नीतिगत निर्णय बताया है।
झारखंड लोक सेवा आयोग ने चौदहवीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और बाल विकास परियोजना अधिकारी नियुक्ति परीक्षा को रद्द किए जाने के मामले में हाई कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। आयोग ने अदालत के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करते हुए राज्य सरकार के निर्णय का समर्थन किया है। आयोग ने कहा है कि परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला पूरी तरह राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है और सरकार ऐसा निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
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सरकार को नीतिगत फैसला लेने का पूरा अधिकार
चौदहवीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को राज्य सरकार द्वारा रद्द किए जाने के खिलाफ आशीष अक्षत ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर आयोग ने अपने जवाब में अदालत को बताया कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय राज्य सरकार का है। आयोग के अनुसार सरकार को इस प्रकार का नीतिगत फैसला लेने का पूरा अधिकार प्राप्त है और वह परिस्थितियों के अनुसार परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
वहीं, बाल विकास परियोजना अधिकारी नियुक्ति परीक्षा को रद्द किए जाने के खिलाफ सुभाष मुर्मू ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में भी आयोग ने अदालत में इसी तरह का जवाब दाखिल किया है। आयोग ने कहा है कि सरकार को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लेने का अधिकार है और इस संबंध में सरकार द्वारा लिया गया फैसला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।
हाई कोर्ट में अब आगे की सुनवाई
इन दोनों मामलों में हाई कोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत के आदेश के अनुपालन में आयोग ने अपना पक्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। आयोग का जवाब मिलने के बाद अब हाई कोर्ट राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं पर आगे सुनवाई करेगा।