महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की व्यवस्थाओं पर अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) सीधे नजर रखेगा। नई दिल्ली स्थित आयोग के मुख्यालय से अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति से लेकर मरीजों की आवाजाही तक की निगरानी की जाएगी। इसके लिए आयोग ने अस्पताल परिसर के 12 प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का ब्योरा और उनके पासवर्ड मांगे हैं। इस व्यवस्था के जरिए आयोग संबंधित स्थानों की गतिविधियों की लाइव निगरानी कर सकेगा।
अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित उपस्थिति की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। मरीजों की ओर से अक्सर शिकायतें मिलती रही हैं कि चिकित्सक ओपीडी से अनुपस्थित रहते हैं या आपातकालीन विभाग में संबंधित कर्मचारी समय पर मौजूद नहीं होते। लाइव फीड के जरिए अस्पताल की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।
हालांकि, किसी कर्मचारी की अनुपस्थिति की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज के साथ ड्यूटी रोस्टर और उपस्थिति रजिस्टर का भी मिलान किया जाएगा। इससे ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
12 प्रमुख स्थानों के कैमरों की मांगी जानकारी
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने अस्पताल के 12 प्रमुख स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड के लिए उनका ब्योरा और पासवर्ड मांगा है। इनमें मुख्य प्रवेश द्वार, पंजीकरण काउंटर, आपातकालीन वार्ड, ओपीडी परिसर, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) और बाल गहन चिकित्सा इकाई जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इन कैमरों के माध्यम से आयोग ओपीडी में मरीजों की कतार, पंजीकरण काउंटर के संचालन और आपातकालीन वार्ड में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं पर नजर रख सकेगा।
कैमरे दुरुस्त करने और इंटरनेट व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के निर्देश मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चिह्नित किए गए सभी 12 कैमरों को दुरुस्त करने और इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने बताया कि आयोग ने 12 महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के पासवर्ड मांगे हैं। इस संबंध में संबंधित तकनीकी कर्मचारियों को जल्द पासवर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से अस्पताल के कामकाज में सुधार आएगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और स्वास्थ्यकर्मियों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।