झारखंड उच्च न्यायालय ने रामगढ़ जिले में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा करते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को नियमित और प्रभावी निगरानी करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने 27 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
साल में दो बार होगी दोनों फैक्ट्रियों की जांच
अदालत ने कहा कि बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड के खिलाफ फिलहाल पर्यावरण कानूनों के लगातार उल्लंघन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, कोर्ट ने प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था में कमियां जरूर मानी हैं।
केंद्रीय सर्वर से जुड़ा रहेगा निगरानी सिस्टम
उच्च न्यायालय ने दोनों औद्योगिक इकाइयों के सतत उत्सर्जन निगरानी सिस्टम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीय सर्वर से लगातार जोड़े रखने का निर्देश दिया है। अगर किसी भी स्थिति में 48 घंटे से अधिक समय तक प्रदूषण का स्तर निर्धारित सीमा से ऊपर दर्ज होता है तो संबंधित औद्योगिक इकाई को सात दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य होगा।
पानी के नमूनों की तीन महीने में फिर जांच
विवा इंटरनेशनल स्कूल के आसपास के पानी में फ्लोराइड, टीडीएस और नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित मानकों से थोड़ी अधिक पाई गई है। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए तीन महीने के भीतर किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा दामोदर नदी के पानी की भी जांच होगी। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र के ऊपरी और निचले हिस्से से पानी के नमूने लिए जाएंगे। अगर जांच में यह साबित होता है कि नदी में प्रदूषण की वजह औद्योगिक इकाइयां हैं, तो उनके खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए चार महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी।