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झारखंड: पूर्व पत्नी से दोबारा निकाह से मना करना अपराध नहीं, हलाला मामले में हाईकोर्ट का फैसला

Wed, 09 Sep 2026 08:33 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची

सार

झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि हलाला की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करने से पूर्व पति के इनकार को अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पढ़ें पूरी खबर
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झारखंड उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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झारखंड उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि हलाला की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करने से पूर्व पति का इन्कार करना अपराध नहीं है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में किसी भी नागरिक को उसकी इच्छा के विरुद्ध दोबारा विवाह के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह मामला गिरिडीह जिले से जुड़ा है, जहां पक्षकारों के बीच निकाह से जुड़ा यह कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ था।
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 कोई कानूनी बाध्यता नहीं
अदालत ने फैसले में कहा कि हलाला की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्व पति पर अपनी तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं रहती। यदि पूर्व पति अपनी इच्छा से दोबारा वैवाहिक संबंध स्थापित करने से मना करता है, तो उसके इस कदम को किसी भी स्थिति में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। उच्च न्यायालय के अनुसार हर नागरिक को अपनी शादी और जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है।

 गिरिडीह जिले का मामला
गिरिडीह जिले से जुड़े इस मामले में तलाक होने के बाद नियमानुसार हलाला की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके पश्चात् तलाकशुदा पत्नी अपने पूर्व पति से पुनः निकाह करना चाहती थी। जब पूर्व पति ने महिला के साथ दोबारा निकाह करने से साफ इन्कार कर दिया, तब यह विवाद कानूनी रूप लेकर अदालत तक पहुंचा।
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 अदालत ने आदेश में रेखांकित किया कि विवाह जैसे व्यक्तिगत विषयों में पक्षकार की स्वतंत्र सहमति अत्यंत आवश्यक होती है। कानून किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ जाकर शादी करने या वैवाहिक रिश्ते को स्वीकार करने के लिए विवश नहीं कर सकता।
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