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झारखंड: खनिज सेस के अधिकार पर नवंबर में सरकार बुलाएगी विशेष सत्र, केंद्र के संशोधित कानून का करेगी विरोध

Mon, 26 Oct 2026 09:00 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड सरकार खनिज पर सेस वसूलने के अधिकार को लेकर नवंबर के पहले सप्ताह में विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मंगलवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र के आयोजन पर अंतिम निर्णय हो सकता है।
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झारखंड सीएम हेमंत सोरेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खनिज पर सेस (उपकर) वसूलने के अधिकार को लेकर झारखंड सरकार नवंबर के पहले सप्ताह में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मंगलवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में दो दिवसीय विशेष सत्र के आयोजन पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। राज्य सरकार केंद्र सरकार के हालिया खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम का विरोध कर रही है। सरकार का कहना है कि नए अधिनियम से खनिज पर सेस वसूलने का राज्य का अधिकार प्रभावित हुआ है। इससे मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना समेत कई जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर संकट पैदा हो सकता है।

अधिनियम के विरोध में प्रस्ताव पारित करने की तैयारी

राज्य सरकार विशेष सत्र के दौरान केंद्र के संशोधित अधिनियम पर विधानसभा में चर्चा कराएगी और इसके विरोध में प्रस्ताव पारित करने की तैयारी में है। मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ही विशेष सत्र आयोजित किया जा सकेगा। सरकार इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए खनिज पर सेस वसूलने के अधिकार को बनाए रखने की कोशिश करेगी।

अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक सेस वसूलने का दावा

केंद्र सरकार की ओर से नियमों में बदलाव किए जाने के बावजूद झारखंड सरकार ने खनिज पर सेस की वसूली बंद नहीं की है। राज्य सरकार के अनुसार, अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक सेस वसूला जा चुका है। सरकार खनिज पर सेस लगाने की अपनी शक्ति छोड़ने को तैयार नहीं है। वह इस मुद्दे को राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और जल, जंगल तथा जमीन पर अधिकारों से जोड़कर देख रही है।

पहले अक्टूबर में प्रस्तावित था विशेष सत्र

इससे पहले झारखंड सरकार ने पांच और छह अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की रूपरेखा तैयार की थी। हालांकि, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पुत्री का सड़क हादसे में निधन होने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद निधन के कारण बैठकें टालनी पड़ी थीं।

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अब सरकार नवंबर के पहले सप्ताह में विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के संशोधित अधिनियम के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट करने की तैयारी में है। मंगलवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र की तारीख और आयोजन से जुड़े अन्य पहलुओं पर निर्णय होने की संभावना है।

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