मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने सोमवार को राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक योगदा सत्संग आश्रम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आश्रम के वरिष्ठ संतों स्वामी ईश्वरानंद जी और स्वामी निर्मलानंद जी से मुलाकात की तथा संस्था की आध्यात्मिक और जनसेवा गतिविधियों की जानकारी ली।
आश्रम पहुंचने पर प्रबंधन और साधकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन का आत्मीय स्वागत किया। संतों के साथ बातचीत के दौरान आश्रम की आध्यात्मिक गतिविधियों, सामाजिक सेवा कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में संचालित अभियानों के बारे में जानकारी दी गई।
सोरेन दंपती ने क्रिया योग के प्रणेता श्री श्री परमहंस योगानंद जी के पावन कक्ष का भी अवलोकन किया। यहां उनकी चारपाई, चरण-चिह्न, उपयोग में लाए गए वस्त्र, छाता और पवित्र गुलाब का फूल सुरक्षित रखा गया है।
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मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन ने आश्रम की फोटो एवं पुस्तक दीर्घा का भी भ्रमण किया। दीर्घा में परमहंस योगानंद जी के जीवन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें, उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'योगी कथामृत' (ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी), उनके शिष्यों की पुस्तकें और विशेष स्मारक डाक टिकट प्रदर्शित हैं। इसके बाद उन्होंने आश्रम के शांत उद्यानों, स्मृति मंदिर और ऐतिहासिक लीची वेदी का भ्रमण किया। मान्यता है कि परमहंस योगानंद जी इस वेदी पर बैठकर घंटों ध्यान साधना किया करते थे।
रांची स्थित योगदा सत्संग आश्रम को योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया का मुख्य केंद्र और पहला आश्रम माना जाता है। संस्था की स्थापना वर्ष 1917 में श्री श्री परमहंस योगानंद जी ने की थी। उन्होंने भारत की योग परंपरा और क्रिया योग का पश्चिमी देशों में भी प्रसार किया।
वर्ष 1918 में परमहंस योगानंद जी ने रांची में बच्चों के लिए एक आवासीय विद्यालय की नींव रखी थी। इसमें आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर भी जोर दिया जाता था। आश्रम का पुराना मुख्य भवन आज भी संरक्षित है। परिसर का विशाल ध्यान मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है, जहां एक साथ सैकड़ों साधक और भक्त ध्यान करते हैं।