सार
साहिबगंज के तिलभिट्ठा कस्तूरबा गांधी विद्यालय की करीब 300 छात्राओं ने पूर्व वार्डन, रसोइया और सुरक्षा गार्ड की बहाली की मांग पर मुख्य द्वार में ताला लगाकर पांच घंटे धरना दिया। अधिकारियों की समझाइश के बाद छात्राएं परिसर में लौटीं और बातचीत हुई।
तिलभिट्ठा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की करीब 300 छात्राओं ने पूर्व वार्डन, सुरक्षा गार्ड और रसोइया की दोबारा सेवा में वापसी की मांग को लेकर मंगलवार को विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। छात्राएं गेट के बाहर धरने पर बैठ गईं। करीब पांच घंटे तक चले विरोध के कारण शिक्षक और अन्य कर्मचारी भी परिसर के बाहर रहे।
कड़ी धूप के बावजूद छात्राएं खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठी रहीं। छात्राओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर पूर्व वार्डन प्रिया सरिता हांसदा को वापस लाने की मांग लिखी थी। छात्राओं का कहना था कि उन्हें पुरानी वार्डन ही चाहिए।
अधिकारियों ने समझाने का किया प्रयास
प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी रॉबिन चंद्र मंडल अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं को समझाने और आंदोलन समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं। अधिकारियों और शिक्षकों के काफी समझाने के बाद कुछ छात्राओं ने पीने का पानी स्वीकार किया, लेकिन आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया।
बाद में जिला शिक्षा अधीक्षक उर्मिला हांसदा अधिकारियों के साथ विद्यालय पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं से सीधे बातचीत की और काफी समझाने के बाद उन्हें विद्यालय परिसर के अंदर जाने के लिए राजी किया। इसके बाद शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्य सभागार में छात्राओं के साथ करीब दो से तीन घंटे तक बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं।
शिकायत के बाद तीन कर्मियों की संविदा हुई थी रद्द
पूर्व में एक छात्रा की शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले की जांच कराई थी। विभागीय अधिकारियों की टीम ने विद्यालय पहुंचकर छात्राओं से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से पूछताछ की थी। जांच के दौरान वार्डन, रसोइया और सुरक्षा गार्ड के खिलाफ स्वेच्छाचारिता और मनमानी से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीनों कर्मियों की संविदा रद्द कर दी थी और उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया था। छात्राएं इसी कार्रवाई को वापस लेने और तीनों कर्मियों की दोबारा बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रही थीं।