प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राधा कृष्ण की अदालत ने युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य दोषी राहुल लोहार को 25 साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को छह साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, सह-आरोपी राजा लोहार को 20 साल के कठोर कारावास और 8,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने की स्थिति में उसे पांच साल अतिरिक्त सजा काटनी होगी। अदालत ने महज चार महीने के भीतर सभी सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया।
आठ गवाहों की गवाही और मजबूत साक्ष्य बने आधार
अदालत ने शुक्रवार को दोनों दोषियों पर अन्य कानूनी धाराओं के तहत भी सजा और जुर्माना निर्धारित किया। अदालत ने राहुल लोहार और राजा लोहार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 332बी के तहत चार-चार साल के कारावास और 5,000-5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड का भुगतान न करने पर दोनों को एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य और आठ गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने गवाहों की गवाही और साक्ष्यों को सही पाते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को मंडल कारागार भेज दिया गया।
आधी रात घर से उठाकर नदी किनारे ले गए
वारदात नाला थाना क्षेत्र से जुड़ी है। पीड़िता पढ़ाई पूरी करने के लिए कुंडहित स्थित अपनी नानी के घर रह रही थी। मई महीने की आधी रात को वह घर के आंगन में सो रही थी। इसी दौरान आरोपी राहुल लोहार और राजा लोहार चुपके से घर में घुस आए। दोनों आरोपियों ने जबरन युवती को कंधे पर उठाया और शीला नदी के किनारे ले गए। आरोप है कि वहां राहुल लोहार ने युवती के साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान दूसरा आरोपी राजा लोहार पास में बैठा रहा और मुख्य आरोपी का साथ देता रहा।
जान से मारने की धमकी, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत
वारदात के समय अंधेरा होने के कारण युवती के शोर मचाने के बावजूद कोई मदद के लिए नहीं पहुंच सका। आरोपियों ने उसके कपड़े अंधेरे में इधर-उधर फेंक दिए और घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों के जाने के बाद पीड़िता किसी तरह अपने पास पड़े दुपट्टे को लपेटकर घर पहुंची और परिजनों को पूरी आपबीती बताई।
29 मई को दर्ज कराई प्राथमिकी
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और गांव के लोगों ने पीड़िता को ढांढस बंधाया। परिजनों के साथ जाकर पीड़िता ने 29 मई को नाला थाना में दोनों आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लगातार सुनवाई की और आठ गवाहों के बयानों व उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।