झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों को बातचीत का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों की समस्याओं का केवल जांच के जरिए नहीं, बल्कि स्थायी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच रांची जिला प्रशासन ने भी आंदोलनरत छात्रों से बातचीत की पहल की, हालांकि छात्रों ने साफ कर दिया कि वार्ता बंद कमरे में नहीं, बल्कि आंदोलन स्थल पर और मीडिया की मौजूदगी में ही होगी।
मुख्यमंत्री बोले- छात्रों के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि युवा साथियों की चिंताएं राज्य सरकार के लिए बेहद गंभीर विषय हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक का मुद्दा केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के कई राज्यों के युवाओं के सामने एक बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार इस पूरे मामले पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। संबंधित एजेंसियां लगातार जांच कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भी भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि युवाओं की समस्याओं का पुख्ता और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।
'अपनी बात सरकार के सामने रखें, हर सुझाव पर होगा गंभीरता से विचार'
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार के दरवाजे हमेशा छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए खुले हैं। जिन छात्रों की कोई मांग, शिकायत या सुझाव है, वे अपनी बात सीधे सरकार के समक्ष रख सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं की हर बात को पूरी गंभीरता से सुना जाएगा।
आंदोलनरत छात्रों से बातचीत के लिए सरकार की पहल
राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए राज्य सरकार ने पहल की है।
इस संबंध में रांची जिला प्रशासन की ओर से एसडीओ रजत और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) आंदोलन स्थल पहुंचे। एसडीओ ने छात्रों से कहा कि सरकार उनसे बातचीत करना चाहती है और इसके लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया जाए।
छात्रों ने कहा- बातचीत होगी तो यहीं, सरकार खुद आए
सरकार के प्रस्ताव पर छात्रों ने बातचीत के लिए सहमति तो जताई, लेकिन साफ कहा कि वार्ता बंद कमरे में नहीं होगी। आंदोलनकारियों ने बताया कि रांची जिला प्रशासन की ओर से संदेश आया था कि छात्र प्रतिनिधिमंडल सरकार से मिलने सर्किट हाउस पहुंचे, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। छात्रों ने कहा, "जो भी बातचीत होगी, वह यहीं आंदोलन स्थल पर होगी। सरकार को यदि बात करनी है तो वह यहां आकर करे।"