फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेतों से निकलीं, मैदान में चमकीं... अब ब्राजील में तिरंगे की शान बढ़ाएंगी झारखंड की बेटियां

Wed, 16 Sep 2026 10:23 AM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड के हजारीबाग में प्रशिक्षण ले रहीं पृथ्वी उरांव और अनौखी कुमारी का चयन अंडर-17 वर्ल्ड स्कूल एथलेटिक चैंपियनशिप के लिए हुआ है। प्रतियोगिता 3 से 8 दिसंबर तक ब्राजील में आयोजित होगी। गुमला की पृथ्वी लॉन्ग जंप और रांची की अनौखी 400 मीटर हर्डल रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
विज्ञापन
दोनों खिलाड़ियों के साथ कोच - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड के हजारीबाग में मेहनत और पसीना बहा रहीं राज्य की दो बेटियों ने अपने सपनों को अंतरराष्ट्रीय उड़ान दे दी है। कभी खेतों में अपने पिता को मेहनत करते देखकर बड़ी हुईं पृथ्वी उरांव और अनौखी कुमारी अब ब्राजील के अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक ट्रैक पर तिरंगे के लिए दौड़ने और छलांग लगाने की तैयारी में हैं। दोनों का चयन अंडर-17 वर्ल्ड स्कूल एथलेटिक चैंपियनशिप के लिए हुआ है। प्रतियोगिता 3 से 8 दिसंबर तक ब्राजील में आयोजित होगी।

विज्ञापन

झारखंड से इस प्रतियोगिता के लिए कुल 11 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। इनमें हजारीबाग में रहकर प्रशिक्षण ले रहीं पृथ्वी उरांव और अनौखी कुमारी भी शामिल हैं। दोनों के लिए यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सपनों के पूरे होने की दिशा में एक बड़ा पड़ाव है।

किसान की बेटी लगाएगी लंबी छलांग

गुमला की रहने वाली पृथ्वी उरांव पिछले तीन वर्षों से हजारीबाग में रहकर लॉन्ग जंप की तैयारी कर रही हैं। उनके पिता किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है, लेकिन पृथ्वी के सपनों की कोई सीमा नहीं है। हजारीबाग के मैदान में हर दिन लगाई जाने वाली उनकी छलांग अब रेत के गड्ढे तक सीमित नहीं रह गई है। हर अभ्यास के साथ वह अपने प्रदर्शन में नई ऊंचाई हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। घंटों की मेहनत, लगातार अभ्यास और तकनीक में सुधार ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया है, जहां अब उनका सामना देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के खिलाड़ियों से होगा।

हर्डल पार कर अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक पहुंचीं अनौखी

रांची की रहने वाली अनौखी कुमारी ने 400 मीटर हर्डल रेस में अपनी जगह बनाई है। कृषि कार्य से जुड़े परिवार से आने वाली अनौखी ने भी हजारीबाग के मैदान को अपनी मेहनत का केंद्र बनाया। लगातार प्रशिक्षण और अनुशासन के जरिए उन्होंने अपनी रफ्तार और तकनीक को निखारा है। अब वह अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर चुनौती के लिए तैयार हैं। हर्डल रेस में खिलाड़ी को सिर्फ तेज दौड़ना ही नहीं होता, बल्कि रास्ते में आने वाली बाधाओं को सही समय और तकनीक के साथ पार करना होता है। अनौखी की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही है। आर्थिक और व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद वह लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं और अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंच गई हैं।

कोच की मेहनत ने सपनों को दी नई दिशा

पृथ्वी और अनौखी की इस सफलता के पीछे उनके परिवार के साथ-साथ कोच नीरज रॉय और अनुकंपा रूंडा की मेहनत भी अहम रही है। मैदान पर घंटों अभ्यास कराने से लेकर तकनीकी कमियों को दूर करने, फिटनेस पर काम करने और प्रदर्शन में लगातार सुधार की कोशिश ने दोनों खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में मदद की है। खिलाड़ियों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में राज्य की आवासीय खेल व्यवस्था भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। खिलाड़ियों को आवास और प्रशिक्षण की सुविधा मिलने से उन्हें अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने का मौका मिल रहा है।

गोवा में ढाई महीने का विशेष प्रशिक्षण

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की चुनौती को देखते हुए दोनों खिलाड़ियों के लिए गोवा में करीब ढाई महीने का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के हिसाब से तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद दोनों का अगला पड़ाव ब्राजील होगा। हजारीबाग के मैदान से शुरू हुआ दोनों खिलाड़ियों का सफर अब हजारों किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक ट्रैक तक पहुंचने वाला है। हजारीबाग ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्ष अजमेरा ने कहा कि खिलाड़ियों को ब्राजील तक पहुंचाने और उनकी तैयारी में हरसंभव सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्रतिभाओं को उचित मंच मिले, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

दोनों बेटियों की उड़ान में पूरे झारखंड की उम्मीद

पृथ्वी की लॉन्ग जंप की उड़ान हो या अनौखी की हर्डल रेस की रफ्तार, दोनों के सामने सिर्फ पदक जीतने का लक्ष्य नहीं है। उनके साथ किसान पिता की उम्मीदें, मां की दुआएं और कोच की मेहनत भी जुड़ी है। दोनों देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरने की तैयारी कर रही हैं।

विज्ञापन


कल तक जिन कदमों की रफ्तार हजारीबाग के मैदान तक सीमित थी, अब वही कदम ब्राजील की धरती पर अपनी पहचान बनाने निकलेंगे। सफर लंबा है और चुनौती भी बड़ी होगी। सामने दुनिया के खिलाड़ी होंगे। लेकिन अब तक जिस तरह दोनों ने अपनी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की है, उससे उनका हौसला साफ नजर आता है।

हजारीबाग की मिट्टी से निकली इन दोनों बेटियों की उड़ान अब ब्राजील तक पहुंचने वाली है। यह सिर्फ पृथ्वी और अनौखी का सफर नहीं है, बल्कि उन तमाम बेटियों के सपनों की कहानी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद दुनिया के बड़े मंच पर देश का तिरंगा लहराने का सपना देखती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें