राखी खरीदती महिलाएं,दुकान में सजी मिठाइयां
भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन अब नजदीक है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने और उन्हें मिठाई खिलाकर प्यार जताने की तैयारी में जुटी हैं। लेकिन इस बार त्योहार की खुशियों पर महंगाई का असर पड़ता दिख रहा है। झारखंड में रक्षाबंधन से ठीक पहले चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। बाजार में चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से मिठाई की कीमतों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
त्योहारों के दौरान मिठाई की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी महंगी होने से मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ गई है। इसका असर अब मिठाइयों के दाम पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां लोग त्योहार पर परिवार के लिए खुलकर मिठाई खरीदते थे, वहीं अब कई लोग कीमत देखकर इसकी मात्रा कम करने को मजबूर हैं।
चीनी की बढ़ती कीमत को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में अब हर त्योहार से पहले लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने का असर मिठाई की कीमतों पर पड़ रहा है और इसका सीधा बोझ आम लोगों की जेब पर जा रहा है। रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर भी लोगों को खर्च करने से पहले कई बार सोचना पड़ रहा है।
वहीं, हवाईनगर की दुकान संचालिका रानी जायसवाल ने कहा कि चीनी की कीमत बढ़ने से व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों का बजट भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि पहले जो ग्राहक चार किलो तक चीनी खरीदते थे, अब कई लोग डेढ़ से दो किलो में ही काम चला रहे हैं। इसका असर बाजार की बिक्री पर भी पड़ रहा है।
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कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा के गोपाल सोनी ने चीनी की बढ़ती कीमत को इथेनॉल से जोड़ना गलत बताया। उन्होंने कहा कि महंगाई से आम लोगों को परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीर है और उचित कदम उठाए जाएंगे। कुल मिलाकर, रक्षाबंधन से पहले चीनी की बढ़ती कीमत ने मिठाई का स्वाद कुछ फीका कर दिया है। अब बहनों के सामने सवाल है कि भाई की कलाई पर राखी के साथ मिठास कैसे बरकरार रखी जाए और त्योहार का बजट भी न बिगड़े।
मिठाइयां हुईं महंगी।