सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर 105 किलोमीटर की कठिन पैदल कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। 'बोल बम' के जयघोष के बीच बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और अटूट आस्था देखने को मिल रही है।
105 किलोमीटर की तपस्या के बाद बाबा के दरबार में पहुंचे श्रद्धालु
कई दिनों की कठिन पदयात्रा, बारिश, धूप और थकान को पीछे छोड़ते हुए लाखों कांवरिये बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर निकले श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और विश्वास का महापर्व है। जैसे ही कांवरिये बाबा की नगरी में प्रवेश करते हैं, उनके चेहरों पर थकान की जगह बाबा के दर्शन की खुशी साफ दिखाई देती है।
बाबा के दर्शन को उमड़ रही भीड़
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। 'बोल बम', 'हर-हर महादेव' और 'जय बाबा बैद्यनाथ' के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया है। श्रद्धालु घंटों इंतजार के बाद बाबा के दिव्य दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
यात्रा नहीं, आस्था का अनुभव
देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे कांवरियों का कहना है कि 105 किलोमीटर की यह यात्रा भले ही शारीरिक रूप से कठिन हो, लेकिन बाबा के प्रति अटूट आस्था हर कदम को आसान बना देती है। रास्ते भर मिले सेवा शिविरों, समाजसेवियों के सहयोग और प्रशासन की व्यवस्थाओं ने भी यात्रा को सुगम बनाया।
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बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें हर वर्ष इस यात्रा का बेसब्री से इंतजार रहता है। बाबा के दरबार में पहुंचकर जो आध्यात्मिक शांति और आत्मिक संतोष मिलता है, वही उन्हें बार-बार इस पवित्र यात्रा पर आने के लिए प्रेरित करता है। सावन के इस पावन अवसर पर पूरी बाबा नगरी शिवभक्ति में डूबी हुई है और हर ओर केवल आस्था, विश्वास तथा 'बोल बम' का उत्साह दिखाई दे रहा है।