झारखंड के चक्रधरपुर में मोबाइल चोरी करने वाले ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जो वारदात के बाद चोरी का सामान नेपाल में बेचता था। पुलिस ने भारत-नेपाल सीमा पर कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में गिरोह के हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात समेत कई राज्यों में सक्रिय होने की बात सामने आई है।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर स्थित रेशमी इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान से 52 मोबाइल फोन चोरी करने के मामले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की विशेष टीम ने बिहार से सटे भारत-नेपाल बॉर्डर पर छापेमारी करके इन तीनों आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से चोरी किए गए विभिन्न कंपनियों के 21 मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं।
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सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चक्रधरपुर डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी ने बताया कि गिरोह दुकानों का शटर उठाकर और काटकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। गिरोह के बदमाश भारत में वारदात करने के बाद चोरी के महंगे मोबाइल और बेशकीमती घड़ियां नेपाल ले जाकर बेच देते थे। इस मामले में दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
शटर उठाकर की बड़ी चोरी
चक्रधरपुर थाना क्षेत्र में 5 अक्तूबर 2026 को रेशमी इलेक्ट्रॉनिक्स नामक दुकान को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया था। चोरों ने दुकान का शटर उठाकर अंदर रखे विभिन्न नामी कंपनियों के 52 मोबाइल फोन चुरा लिए थे। इस घटना के बाद चक्रधरपुर थाना कांड संख्या 111/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) और 305(ए) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए। इसके बाद सहायक पुलिस अधीक्षक डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी और थाना प्रभारी के नेतृत्व में अलग-अलग छापामारी दलों का गठन किया गया। पुलिस टीमों ने वैज्ञानिक तरीकों और तकनीकी अनुसंधानों का सहारा लेकर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए सीआईडी की विशेष फिंगरप्रिंट टीम को भी मौके पर बुलाया था। जांच के दौरान पुलिस को इस वारदात में पांच आरोपियों की सीधी संलिप्तता का पता चला।
नेपाल सीमा पर बिछाया जाल
साक्ष्यों और तकनीकी सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर सघन छापेमारी शुरू की। इस दौरान पुलिस को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य सीमावर्ती इलाके में मौजूद हैं। पुलिस की टीम ने भारत-नेपाल सीमा पर घेराबंदी करके तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में बिहार के मोतिहारी जिले के घोड़ासहन निवासी नितेश पटेल, पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल निवासी जितेंद्र साह उर्फ चोना और सुपौल जिले के राघोपुर निवासी गोविंद चौधरी शामिल हैं। पुलिस की पूछताछ और जांच में सामने आया कि इन तीनों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। यह शातिर गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय था। आरोपियों ने हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों में दुकानों के शटर काटकर या उठाकर चोरी की कई घटनाओं को अंजाम दिया था। गिरोह अलग-अलग राज्यों में जाकर अपराध करता था, जिससे पुलिस के लिए उनकी पहचान करना और उन्हें पकड़ना काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
नेपाली सिम से छिपी लोकेशन
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य चोरी किए गए मोबाइल फोन और घड़ियों को नेपाल के बाजारों में बेचते थे। चोरी के मोबाइल फोन में नेपाल के सिम कार्ड सक्रिय कर दिए जाते थे। इसके कारण भारतीय पुलिस के लिए उन मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस कर पाना अत्यधिक जटिल हो जाता था और आरोपी आसानी से बच निकलते थे। पुलिस ने इस मामले में दो अन्य फरार आरोपियों की पहचान मोतिहारी के घोड़ासहन निवासी शेराज और आठमोहान निवासी संजय सहनी के रूप में की है। पुलिस की टीमें इन दोनों की गिरफ्तारी और चोरी गए बाकी 31 मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए जगह-जगह दबिश दे रही हैं।