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झारखंड: वेदांता ईएसएल स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, जहरीली गैस की चपेट में आने से दो की मौत

Sun, 11 Oct 2026 02:40 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

 झारखंड के बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड के सियालजोड़ी स्थित वेदांता ईएसएल स्टील लिमिटेड के संयंत्र में जहरीली गैस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान हजारीबाग निवासी सोहन महतो और धनबाद निवासी समीर अंसारी के रूप में हुई है।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड के बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड के सियालजोड़ी स्थित वेदांता ईएसएल स्टील लिमिटेड के संयंत्र में जहरीली गैस की चपेट में आने से दो श्रमिकों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान हजारीबाग निवासी सोहन महतो और धनबाद निवासी समीर अंसारी के रूप में हुई है। हादसे के बाद संयंत्र परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गैस की चपेट में आने से बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में दोनों की मौत

कंपनी की ओर से जारी बयान के अनुसार, गैस के संपर्क में आने से कंपनी के एक कार्यकारी अधिकारी और एक व्यावसायिक साझेदार के इंजीनियर की तबीयत बिगड़ गई। दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। कंपनी ने शोकाकुल परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और घटना की स्वतंत्र जांच कराने की बात कही है। साथ ही, जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कदम उठाने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि, गैस का रिसाव किन परिस्थितियों में हुआ, दोनों कर्मचारी इसकी चपेट में कैसे आए और क्या सुरक्षा मानकों के पालन में कोई चूक हुई थी, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। घटना के बाद मजदूर संगठनों में भी हलचल तेज हो गई है।

सुरक्षा और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

संयंत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के मामलों में पर्याप्त गंभीरता नहीं बरती जाती। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र में समय-समय पर हादसों की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आता। ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया कि नियोजन के मामले में विस्थापित परिवारों के हितों की अनदेखी की जा रही है। इन शिकायतों के कारण संयंत्र की कार्यप्रणाली और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जांच पर टिकी निगाहें, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग

हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अब जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि गैस रिसाव कैसे हुआ और घटना के समय सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। इस घटना के बाद श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और औद्योगिक हादसों की पुनरावृत्ति रोकने की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। जांच में हादसे के कारणों का पता लगाने के साथ यह भी सुनिश्चित करना अहम होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और संयंत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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