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एयर एम्बुलेंस हादसा: जान बचाने की कोशिश में सात लोगों की मौत, परिवार ने उड़ान के लिए उधार लिए थे 7.5 लाख रुपये

Tue, 24 Feb 2026 02:54 PM IST
झारखंड ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

Air Ambulance Crash: रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस चतरा में दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें मरीज संजय कुमार शॉ सहित सात लोगों की मौत हो गई। परिवार ने इलाज के लिए 7.5 लाख रुपये उधार लिए थे। हादसे ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया।
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एयर एम्बुलेंस हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रांची से दिल्ली के लिए रवाना की गई एक एयर एम्बुलेंस के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत हो गई। यह विमान एक गंभीर रूप से झुलसे झारखंड के होटल व्यवसायी को इलाज के लिए राष्ट्रीय राजधानी ले जा रहा था। परिवार ने इस उड़ान और दिल्ली के एक बड़े निजी अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए लाखों रुपये उधार लिए थे, लेकिन जीवन बचाने की यह कोशिश दर्दनाक हादसे में बदल गई।

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उड़ान भरने के कुछ देर बाद टूटा संपर्क
बीचक्राफ्ट C90 एयर एम्बुलेंस, जिसे रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड संचालित कर रही थी, ने शाम 7 बजकर 11 मिनट पर रांची से उड़ान भरी। लगभग 20 मिनट बाद विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इसके बाद विमान चतरा जिले के एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार खराब मौसम इस हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है।
 
इस हादसे में जिन सात लोगों की मृत्यु हुई, उनमें मरीज संजय कुमार शॉ, उनकी पत्नी अर्चना देवी, रिश्तेदार ध्रुव कुमार, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, नर्स सचिन कुमार मिश्रा और पायलट कैप्टन विवेक विकास भगत तथा कैप्टन सवराजदीप सिंह शामिल हैं।
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होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, 65 प्रतिशत झुलसे थे संजय
संजय झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा में एक होटल चलाते थे। पिछले सोमवार उनके होटल में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई, जिसमें वह बुरी तरह झुलस गए। उन्हें 65 प्रतिशत तक जलने की चोटें आई थीं और रांची के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
 
जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के श्री गंगा राम अस्पताल रेफर कर दिया। उनकी स्थिति सड़क मार्ग से यात्रा के अनुकूल नहीं थी, इसलिए एयर एम्बुलेंस का सहारा लेना पड़ा। परिवार ने रिश्तेदारों से संपर्क कर 7.5 लाख रुपये उधार लिए और कुछ रकम दिल्ली में इलाज के लिए अलग रखी।



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परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
संजय के बड़े भाई विजय शॉ उन्हें रांची एयरपोर्ट तक छोड़ने गए थे। उन्होंने बताया कि वे घर ही पहुंचे थे कि टीवी समाचार के जरिए हादसे की जानकारी मिली। उनके अनुसार सब कुछ एक पल में खत्म हो गया। परिवार का कहना है कि इस हादसे में संजय और उनकी पत्नी अर्चना की मौत से उनके दो बच्चे अनाथ हो गए हैं। परिजनों ने यह भी कहा कि यदि रांची में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो संजय को एयरलिफ्ट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक रिश्तेदार ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि यदि रांची में ही उचित इलाज मिल जाता तो कई अनमोल जिंदगियां बच सकती थीं।
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अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
रांची के देवकमल अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा ने पीटीआई को बताया कि एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था उनके एक मरीज द्वारा की गई थी। डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता के पिता बजरंगी प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी पूरी जमीन बेच दी थी। डॉक्टर गुप्ता रांची के सदर अस्पताल में तैनात थे। उनके पिता ने कहा कि उनका सात साल का एक बेटा है और उन्होंने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी।

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