श्रावणी मेला अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ धाम में एक बार फिर आस्था का बड़ा सैलाब उमड़ने की संभावना है। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, करीब तीन से सवा तीन लाख श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर सकते हैं। पिछली सोमवारी की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम रहने का अनुमान है, लेकिन तीन लाख से अधिक लोगों के बाबाधाम पहुंचने से प्रशासन के सामने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की बड़ी चुनौती होगी। इसे देखते हुए देवघर जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
तीन सोमवारी के अनुभव से मजबूत हुई तैयारी
पहली, दूसरी और तीसरी सोमवारी के दौरान उमड़ी भारी भीड़ से मिले अनुभवों के आधार पर प्रशासन ने अंतिम सोमवारी के लिए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को और मजबूत किया है। संवेदनशील स्थानों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और जवानों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर तक पहुंचाने के साथ भीड़ का दबाव कम करने के लिए रूट व्यवस्था भी सक्रिय रखी गई है। कांवड़ियों की कतार को नंदन पहाड़ की ओर से घुमाकर मंदिर परिसर तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि भीड़ को एक जगह जमा होने से रोका जा सके।
तीन लाख श्रद्धालुओं की भीड़ होगी बड़ी चुनौती
बाबा बैद्यनाथ मंदिर और उसके आसपास के रास्तों की क्षमता सीमित है। ऐसे में तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं का पहुंचना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। प्रशासन की नजर मुख्य रूप से सुरक्षा, यातायात, कतार व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर है। अधिकारियों को लगातार स्थिति की निगरानी करने और भीड़ बढ़ने या किसी तरह की समस्या सामने आने पर तत्काल निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है चौथी सोमवारी
सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। धार्मिक मान्यताओं में समुद्र मंथन और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। इसी आस्था के चलते अंतिम सोमवारी पर देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबाधाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए सावन की अंतिम सोमवारी बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक का विशेष अवसर है। यही वजह है कि अंतिम सोमवारी पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सुगम जलार्पण पर प्रशासन का पूरा फोकस
मंदिर परिसर से लेकर कांवड़िया पथ और शहर के प्रमुख हिस्सों तक सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रखी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को लंबी कतार में लगने के बावजूद कम से कम परेशानी हो और वे सुरक्षित व व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण कर सकें। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारू रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
अंतिम सोमवारी प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा
श्रावणी मेले की अंतिम सोमवारी प्रशासन के लिए पूरे मेले की सबसे अहम परीक्षाओं में से एक मानी जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के इस महासैलाब को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संभालना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
प्रशासन की कोशिश है कि हर श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक सुरक्षित तरीके से पहुंचे, पूजा-अर्चना और जलार्पण करे और इसके बाद सकुशल अपने घर लौटे।