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रांची: आदिवासी महारैली पर संगठनों का विरोध, बोले- चर्च प्रायोजित कार्यक्रम, धर्मांतरितों को जुटाने का आरोप

Fri, 28 Aug 2026 06:38 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला,रांची

सार

रांची में 30 अगस्त को प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली को लेकर कई आदिवासी संगठनों ने विरोध जताया है। केंद्रीय सरना समिति समेत संगठनों ने आरोप लगाया कि रैली के जरिए धर्मांतरित ईसाई समुदाय को संगठित किया जा रहा है। संगठनों ने धर्मांतरण, डीलिस्टिंग, परिसीमन और आदिवासी अस्मिता जैसे मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए।
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प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली का संगठनों ने जताया विरोध, रांची में की वार्ता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगामी 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली को लेकर कई आदिवासी संगठनों ने विरोध जताया है। शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यह रैली आदिवासी एकता के नाम पर चर्च प्रायोजित कार्यक्रम है और इसके माध्यम से धर्मांतरित ईसाई समुदाय को संगठित किया जा रहा है।

केंद्रीय सरना समिति सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब भी ईसाई मिशनरियों से जुड़े मुद्दों पर संकट उत्पन्न होता है, तब आदिवासी एकता की बात उठाई जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संबंधित लोग आदिवासी समाज की मूल परंपराओं और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्ध होते तो सामाजिक एवं धार्मिक पूजा स्थलों को समाप्त करने की मांग नहीं करते।

डीलिस्टिंग की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बताया

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संगठनों ने कहा कि आदिवासी समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में बड़े पैमाने पर हो रहा धर्मांतरण, आदिवासी अस्तित्व एवं अस्मिता की रक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने धर्मांतरित ईसाइयों को मिलने वाले आरक्षण और अन्य सुविधाओं के संबंध में डीलिस्टिंग की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बताया।

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वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन के नाम पर आदिवासी सीटों की संख्या घटने-बढ़ने का फैसला आदिवासी समाज से जुड़े लोग ही करेंगे। किसी भी आदिवासी मामले में चर्च का नेतृत्व अथवा हस्तक्षेप समाज को स्वीकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली के माध्यम से परिसीमन, विदेशी फंडिंग, एफसीआरए और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों का विरोध करने की कोशिश की जा रही है।

 

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