झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगना तय हो चुका है। केंद्रीय कैबिनेट ने अगले छह महीने के लिए झारखंड में राष्ट्रपति शासन की
सिफारिश कर दी है। आज हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। झामुमो के भाजपा से समर्थन वापसी के बाद से राज्य में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था।
झामुमो ने आठ जनवरी को सरकार से समर्थन वापस लिया था। तब से राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई थी। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल ने केंद्र को अनुशंसा रिपोर्ट भेजी थी। राज्यपाल की रिपोर्ट में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई थी। वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर बने झारखंड में पहले भी दो बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है।
82 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा और झामुमो के 18-18 सदस्य हैं। इसके अलावा अर्जुन मुंडा सरकार को ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के छह, जदयू के दो, दो निर्दलीय और एक नामित सदस्य का समर्थन हासिल था। वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस के 13, झारखंड विकास मोर्चा (पी) के 11 और राजद के 5 विधायक हैं।
सीपीआई-एमएल(एल), मार्क्सवादी समन्वय पार्टी, झारखंड पार्टी (एक्का), झारखंड जनाधिकार मंच और जय भारत समता पार्टी का एक-एक सदस्य के अलावा एक निर्दलीय विधायक भी है।