राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिवसीय झारखंड दौरे पर हैं। अपने दौरे के तहत शुक्रवार को राष्ट्रपति पत्नी के साथ रांची पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनका स्वागत किया था। अपने दौरे के दूसरे दिन शनिवार को राष्ट्रपति ने गुमला जिले के बिशुनपुर में विकास भारती के कार्यों को परखा।
राष्ट्रपति कोविंद ने गुमला के बिशुनपुर गांव में पद्मश्री से सम्मानित अशोक भगत की संस्था विकास भारती में आदिवासी समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में कभी-कभी इस प्रकार की विकृतियां पैदा होती हैं कि जबरदस्ती अपने विचार को थोपने की बात सामने आती है। अपनी बात को गलत समझते हुए भी यह कहना कि यही सही है और अपनी ही बात को सही मानना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी कहा करते थे कि यदि आपको मेरी बात सही लगती है तो उस बात को अपना लीजिए और फिर यह कहिए कि यह मैंने कही है, यह मत कहिए कि यह गांधी जी ने कहा है क्योंकि वह बात आपकी हो गई। वह आपके आचरण में आ गया। यदि इस प्रकार हमारा समाज आगे बढ़ेगा तो ही उचित होगा।’
इससे पहले शुक्रवार को दौरे के पहले दिन राजधानी रांची में चेरी-मनातू स्थित विश्वविद्यालय (सीयूजे) के नए परिसर का उद्घाटन करने के बाद दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि शिक्षा का मुख्य ध्येय हर विद्यार्थी के लिए अच्छा इंसान बनना होना चाहिए और इस बात पर जोर दिया कि यह महिला सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है।
इस मौके पर राष्ट्रपति ने 96 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किया उन्होंने कहा कि शिक्षा सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है और इससे बेटियां सशक्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का ध्येय छात्र को अच्छा इंसान बनाना होना चाहिए। अच्छा इंसान होगा और वो डॉक्टर बन गया तो अच्छा डॉक्टर होगा। अच्छा इंसान होगा और अगर वो नेता बन गया तो वो अच्छा सामाजिक नेता होगा। अच्छा इंसान होगा तो अच्छा पति और पिता भी होगा। बेटी अच्छी इंसान होगी तो अच्छी बहू और अच्छी सास भी होगी।
उन्होंने कहा कि बेटियां उच्चशिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। अधिकांश विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में उन्होंने देखा है कि स्वर्ण पदक विजेताओं में बेटियां अधिक होती हैं। सीयूजे में भी पिछले छह वर्षों में 96 में से 64 छात्राओं ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया है जबकि सिर्फ 32 छात्रों को ही स्वर्ण पदक मिला। इस मौके पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और सीयूजे के चांसलर जस्टिस वी एन खरे भी मौजूद थे।