सार
जैन समाज सम्मेद शिखरजी का पर्यटन क्षेत्र घोषित करने से जुड़ी राज्य सरकार की 2019 की अधिसूचना निरस्त करने की मांग कर रहा है। समाज के नेताओं का कहना है कि क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित करने से वहां शराब व मांसाहार का सेवन शुरू हो जाएगा, इससे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी।
झारखंड सरकार जैन समाज के सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखरजी को पर्यटन क्षेत्र बनाने पर अडिग है। देशभर में इसके खिलाफ जैन समाज के आंदोनल के बीच राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि पारसनाथ पर्वत क्षेत्र के विकास के लिए इसे पर्यटन क्षेत्र बनाने का फैसला किया गया है।
जैन समाज सम्मेद शिखरजी का पर्यटन क्षेत्र घोषित करने से जुड़ी राज्य सरकार की 2019 की अधिसूचना निरस्त करने की मांग कर रहा है। समाज के नेताओं का कहना है कि क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित करने से वहां शराब व मांसाहार का सेवन शुरू हो जाएगा, इससे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी।
बढ़ते विवाद के बीच झारखंड के पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने कहा कि 2019 की अधिसूचना में राज्य सरकार ने श्री सम्मेद शिखरजी समेत 200 स्थलों को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया है। यह कदम प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से उठाया गया है। कुमार ने कहा कि इन स्थानों को लंबे समय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन स्थलों के रूप में पहचाना जाता है। यहां दुनिया भर से तीर्थयात्री व पर्यटक आते हैं।
अधिसूचना में संशोधन कर जैन धार्मिक स्थल घोषित करने को तैयार
झारखंड के पर्यटन सचिव ने कहा कि अधिसूचना में श्री सम्मेद शिखरजी के बेहतर प्रबंधन के लिए नियम बनाने के लिए जैन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ एक प्राधिकरण बनाने का भी प्रावधान है। श्री सम्मेद शिखरजी के लिए राज्य सरकार अधिसूचना में संशोधन कर उसमें 'जैन धार्मिक स्थल' को शामिल करने को भी तैयार है।
इसलिए है जैन समाज की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र
झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ियों में श्री सम्मेद शिखरजी हैं। ये रांची से लगभग 160 किलोमीटर दूर राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। यह जैन समाज के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। दिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदायों के लिए यह श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। यहां 24 जैन तीर्थंकरों में से 20 का मोक्ष हुआ था।
पारसनाथ हिल्स वन्य जीव अभयारण्य का हिस्सा
पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने कहा कि पारसनाथ पर्वतमाला कोई सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है। यह वन्य जीव अभयारण्य (wildlife sanctuary) के दायरे में आता है। इसलिए यहां छोटे से भी निर्माण के लिए वन्यजीव प्राधिकरण की अनुमति लेना पड़ती है। इसलिए वहां बहुत अधिक विकास नहीं हो सका है। मेरी राय में यह अधिसूचना जैन समाज के हित में है। पारसनाथ प्राधिकरण का गठन हो चुका है, लेकिन अभी कामकाज शुरू नहीं हुआ। हम इसका कामकाज शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। यह प्राधिकरण सम्मेद शिखरजी के लिए जैसे नियम बनाना चाहेगा, वैसे बना सकेगा।